क्रिप्स प्रस्तावों का विरोध - Page 370

परिशिष्ट

355

सभा की स्वीकृति देने के लिए तैयार हो गई है। एक वर्ष पहले ब्रिटिश सरकार ने कहा था कि वे पाकिस्तान बनने की अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि ऐसा करना भारत को टुकड़ों में बांट देना होगा। आज वे भारत का विभाजन करने के लिए तैयार हो गए हैं। महान ब्रिटिश साम्राज्य ने कैसे विवेक खो दिया है। उनका स्पष्टीकरण केवल इतना ही है कि युद्ध के फलस्वरूप ब्रिटिश सरकार घबरा कर ऐसा कर रही है। वे प्रस्ताव गफलत के परिणामस्वरूप लाए गए हैं। कितना बड़ा आतंक है जिसने ब्रिटिश सरकार को झकझोर दिया। इसी से स्पष्ट होता है कि कांगे्रस और मुस्लिम लीग की मांगे क्या हैं और उन्हें इन प्रस्तावों के जरिए क्या सुविधाएं दी गई हैं? कांगे्रस की मांग थी कि संविधान सभा केवल बहुसंख्यक मत के आधार पर संविधान का निर्माण करे। दूसरी ओर जब वायसराय ने घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार अल्पसंख्यकों को कांगे्रस के उत्पीड़न की भागीदार नहीं बन सकती। सभी वर्गों में कांगे्रस कार्य समिति में 22 अगस्त, 1940 की बैठक में निम्नलिखित प्रस्ताव पास किया थाःµ

फ्समिति इस बात पर खेद प्रकट करती है कि यद्यपि कांगे्रस ने किसी

अल्पसंख्यक समाज को कभी भी उत्पीडि़त करने की बात नहीं सोची और

न ब्रिटिश सरकार से इसके संबंध में कुछ कहा, उसकी निर्वाचित प्रतिनिधियों

द्वारा संविधान सभा के माध्यम से बनने वाले संविधान की मांग की गलत

व्याख्या करके अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का मुद्दा उठा कर भारतीयों की

प्रगति में रोड़ा अटकाया है।य्

कार्य समिति ने इसके साथ और जोड़ दियाःµ

फ्कांगे्रस ने प्रस्ताव किया है कि संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की

पूरी रक्षा की जाएगी और इसके सम्बद्ध अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों से समझौता

किया जाएगा।य्

इससे स्पष्ट है कि कांगे्रस ने भी ऐसी मांग नहीं की थी कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का फैसला संविधान सभा के कार्यक्षेत्र में शामिल किया जाए। तब भी ब्रिटिश सरकार ने केवल साधारण बहुमत के आधार पर इन अल्पसंख्यक के अधिकारों पर निर्णय देने का अतिरिक्त अधिकार दिया। पाकिस्तान के संबंध में भी इसी प्रकार का रूख स्पष्ट होता है। मुस्लिम लीग ने यह मांग नहीं की थी, कि पाकिस्तान की मांग फौरन मान ही ली जाए। मुस्लिम लीग ने जो मांग की थी, वह इतनी ही थी कि संविधान का अगला पुनरीक्षण करते समय मुसलमानों को पाकिस्तान का प्रश्न उठाने से रोका न जाए। वर्तमान प्रस्ताव इससे भी एक कदम और आगे बढ़ गए और मुस्लिम लीग को पाकिस्तान बनाने का अधिकार दे डाला। वे संवैधानिक प्रस्ताव हैं।