परिशिष्ट
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परिशिष्ट - 10
लार्ड वेवल और श्री गांधी के मध्य पत्र-व्यवहार - 1944
1 - 15 जुलाई, 1944 को श्री गांधी की ओर से वायसराय को लिखा गया पत्र
फ्प्रिय मित्र,
मैंने न्यूज क्रानिकल के संपादक श्री गेल्डर को, जो बयान दिया था, अब भारतीय अखबारों में छप गया है। निस्संदेह आपने उस पत्रिका की अधिकृत प्रतियों को देखा होगा। मैंने प्रेस से कहा था कि वे पहले आपको दिखा दिए जायें परंतु श्री गेल्डर ने निस्संदेह उसे पहले ही छाप दिया, इसके लिए मुझे अफसोस है। तब भी मेरे 17 जून, 1944 के पत्र से यदि आप मेरा एक अनुरोध भी मान लेते, तो यह प्रकाशन कुबड़े को लात रास आ जाने के समान होता।
भवदीय,
ह. (मो.क. गांधी)य् 2. 22 जून 1944 को वायसराय का गांधी जी को उत्तर
फ्प्रिय श्री गांधी,
आपके 15 जुलाई के पत्र के लिए धन्यवाद। मैंने श्री गेल्डर को आपके द्वारा दिया गया साक्षात्कार और बाद में आपका स्पष्टीकरण देखा। मैं इस समय उस पर कोई खास टिप्पणी नहीं कर सकता, सिवाय इसके कि मैं अपने पहले पत्र को दोहराऊं। यदि आप मुझे निश्चित और रचनात्मक नीति भेजेंगे, मैं उस पर प्रसन्नता से विचार करूंगा।
भवदीय
ह. (वेवल)य् 3. गांधी जी का वायसराय को दिनांक 27 जुलाई, 1944 को लिखा गया पत्र
फ्प्रिय मित्र,
मुझे आपके 22 जुलाई के पत्र से निराशा हुई, परंतु मैं, निराशा में भी काम करता रहता हूं। यह मेरा ठोस प्रस्ताव है।
मैं कार्यसमिति को यह घोषणा करने की राय देने के लिए तैयार हूं कि इस बदली हुई परिस्थिति में अगस्त 1942 के प्रस्ताव के अंतर्गत चलाया जा रहा सविनय अवज्ञा आंदोलन न चलाया जाए और विश्व युद्ध में सरकार को पूरा सहयोग दिया जाए। परंतु