लार्ड वेवल और श्री गांधी के मध्य पत्र-व्यवहार - 1944 - Page 373

358 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शर्त यह है कि तुरंत भारतीय स्वतंत्रता की घोषणा की जाए और केंद्रीय विधान सभा के लिए उत्तरदायी राष्ट्रीय सरकार बनाई जाए। इस शर्त के साथ कि विश्व युद्ध के दौरान मौजूदा हालत में सैनिक कार्यवाही होती रहे। परंतु उसका आर्थिक बोझ भारत पर न डाला जाए। यदि ब्रिटिश सरकार किसी प्रकार का समझौता करना चाहती है, तो पत्र व्यवहार के स्थान पर मित्रता-पूर्वक वार्तालाप होना चाहिए। मैं आपके हाथों में हूं। जब तक तनिक भी सम्मानजनक समझौते की आशा दिखाई पड़ेगी, मैं प्रयास करता रहूंगा।

पिछले पत्र के बाद मैंने हाउस ऑफ लार्डस में लार्ड मंस्टर का भाषण पढ़ा। हाउस ऑफ लार्डस में उन्होंने जो कुछ संक्षेप में कहा वह स्पष्ट रूप से मेरे प्रस्ताव के अनुरूप है। यह संक्षिप्त भाषण पारस्परिक मित्रतापूर्ण वार्तालाप का आधार बन सकता है।

आपका विश्वासपात्र

ह. (मो.क. गांधी)य्

4 - वायसराय का श्री गांधी को दिनांक 15 अगस्त, 1944 का उत्तर

फ्प्रिय श्री गांधी,

आपके 27 जुलाई के पत्र के लिए धन्यवाद। आपके प्रस्ताव हैंःµ

(1) कि आप कार्य समिति को सलाह इन सूरतों पर देंगे (अ) कि बदली

हुई परिस्थितियों के विचार से अगस्त 1942 के प्रस्ताव के अंतर्गत चलाया

जा रहा सविनय अवज्ञा आंदोलन नहीं चलाया जाए। (ब) यह कि युद्ध काल

में कांगे्रस के साथ पूरा सहयोग करें, बशर्ते (2) कि ब्रिटिश सरकार (अ)

तुरंत भारतीय स्वतंत्रता की घोषण करें और (ब) इस शर्त पर केंद्रीय विधानस

भा के प्रति उत्तरदायी राष्ट्रीय सरकार की स्थापना की जाए कि विश्व युद्ध

के दौरान सैनिक कार्यवाहियां ज्यों कि त्यों चलती रहें, परंतु उनका आर्थिक

बोझ भारत पर न डाला जाए।य्

ब्रिटिश सरकार बहुत चाहती है कि भारतीय समस्याओं को हल करने के लिए कोई उचित समझौता किया जाए। परंतु विचार विमर्श के बाद आपके द्वारा लाए गए प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं हैं, और यदि आपने हाउस ऑफ कामंस में श्री एमेरी के इसी 28 जुलाई के बयान को पढ़ा हो, तो आपको इसका अहसास हो जाएगा। वे प्रस्ताव वैसे ही प्रस्ताव हैं, जो मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपै्रल 1942 में सर स्टेफर्ड क्रिप्स के सामने किये थे और ब्रिटिश सरकार ने ठीक उन्हीं कारणों के आधार पर उन्हें अस्वीकार कर दिया था जिन कारणों पर पहले अस्वीकार किया था।