लार्ड वेवल और श्री गांधी के मध्य पत्र-व्यवहार - 1944 - Page 374

परिशिष्ट

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  1. सभी विवरणों को विस्तार से फिर ध्यान में लाए बिना मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिटिश सरकार ने उस समय यह स्पष्ट कर दिया था किःµ

(अ) युद्ध समाप्त हो जाने के बाद बिना शर्त भारत को स्वतंत्रता दिए जाने

का प्रस्ताव बाद में सशर्त कर दिया गया था कि भारत के राष्ट्रीय रंगमंच

पर प्रमुख दलों द्वारा संविधान निर्माण पर सहमति और ब्रिटेन के साथ संधि

की जाएगी।

(ब) यह कि विश्व युद्ध के दौरान संविधान में किसी प्रकार का ऐसे

परिवर्तन करना संभव नहीं है, जिसका अर्थ, जैसा आपने सुझाया, यह हो

कि राष्ट्रीय सरकार केंद्रीय सभा के प्रति उत्तरदायी है।

इन शर्तों का मुख्य उद्देश्य था कि दलित वर्ग जैसे जातीय और धार्मिक

अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा के अपने कर्तव्य को पूरा करना तथा

भारतीय राज्यों के साथ संधि करना।

  1. उपरोक्त शर्तों पर ब्रिटिश सरकार ने अंतरिम सरकार में भाग लेने के लिए भारतीय नेताओं को आमंत्रित किया था, जो वर्तमान संविधान के अनुसार चलेगी। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जब तक युद्ध समाप्त नहीं हो जाता और नया संविधान लागू नहीं हो जाता ब्रिटिश सरकार एवं गवर्नर जनरल देश की सारी बागडोर अपने पास ही रखेंगे। जहां तक युद्ध व्यय में भारत के हिस्से की बात है, ब्रिटिश सरकार और भारत सरकार के मध्य तय होना जरूरी है और मौजूदा वित्तीय प्रबंध इन दोनों में किसी एक को करना होगा।

  2. यह स्पष्ट है कि आपने जो सलाह दी उस पर इन परिस्थितियों में वार्तालाप करने से कोई लाभ नहीं है। हालांकि यदि हिंदुओं, मुसलमानों और प्रमुख अल्पसंख्यकों के नेता वर्तमान संविधान के अधीन अंतरिम सरकार की स्थापना में सहयोग करने के लिए इच्छुक हों, तो मुझे विश्वास है कि इससे कुछ अच्छी प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। ऐसी अंतरिम सरकार के बनने से पहले हिंदुओं, मुसलमानों तथा प्रमुख दलों के मध्य एक आम समझौता हो जाना चाहिए कि किस सिद्धांत पर नया संविधान बनाया जाए। यह आम समझौता भारतीयों को ही करना है।

जब तक सभी भारतीय नेता इस समय मतभेद की अपेक्षा एक दूसरे के और नजदीक नहीं आ जाते, तब तक मैं इसके संबंध में कुछ नहीं कर सकता। मैं आपको स्मरण कराना चाहूंगा कि अल्पसंख्यकों की समस्याएं आसान नहीं हैं। ये समस्याएं वास्तविक हैं और सहिष्णुता और पारस्परिक समझौते से हल की जा सकती हैं।

  1. विश्व युद्ध समाप्त हो जाने के बाद अंतरिम सरकार का कार्यकाल कितना होगा, यह इस पर निर्भर करेगा कि नए संविधान की रचना में कितना समय लगता