परिशिष्ट
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परिशिष्ट - 11
अनुसूचित जातियों की राजनैतिक मांगें
मद्रास में 23 सिंतबर 1944 को राय बहादुर एन शिवराज बी.ए., बी.एल., एम.एल.ए. की अध्यक्षता में भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्य समिति की बैठक में नए संविधान में अस्पृश्यों के हितों के संरक्षण के संबंध में पास किए गए संकल्प।
संकल्प संख्या - 1
विषयःµ अनुसूचित जातियों के पृथक अस्तित्व को मान्यता देना।
भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्यसमिति को ज्ञात है कि भारत में कुछ अखबार आरोप लगा रहे हैं कि 15 अगस्त, 1944 के श्री गांधी के पत्र के उत्तर में वायसराय ने जो बयान जारी किया है कि अनुसूचित जातियों का भारत के राष्ट्रीय जीवन में महत्वपूर्ण और पृथक अस्तित्व है और भारत के भावी संविधान बनाने के संबंध में इन अनुसूचित जातियों का भागीदार होना आवश्यक शर्त है, क्रिप्स प्रस्तावों में ब्रिटिश सरकार द्वारा परिभाषित स्थिति से उठना है। यह समिति इस प्रकार के प्रोपेगेंडा पर विरोध प्रकट करती है और इस अवसर पर बहुत ही खासतौर पर जोर डाल कर यह बता देना चाहती है कि अनुसूचित जातियों का भारत के राष्ट्रीय जीवन में पूर्णतया अपना पृथक अस्तित्व है और क्रिप्स प्रस्तावों के अर्थों में सिखों तथा मुसलमानों की अपेक्षा वे अधिक धार्मिक अल्पसंख्यक हैं। कार्यसमिति बतला देना चाहती है कि लार्ड वेवल ने श्री गांधी को अपने पत्र में जो कुछ लिखा है, आरंभ से ही ब्रिटिश सरकार का वैसा विचार रहा है। इसे 1917 में घोषित कर दिया गया था, जब मांटेग्यू चेम्सफोर्ड रिपोर्ट तैयार करने वालों ने भारत में उत्तरदायी सरकार के साथ-साथ राजनीतिक पर्दापण का लक्ष्य बताया था और बाद में ब्रिटिश सरकार ने सम्मेलन में अनुसूचित जातियों के पृथक अस्तित्व और पृथक निर्वाचन की पुष्टि कर दी थी और वहीं पुष्टि संयुक्त संसदीय समिति गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में हिंदुओं से बिल्कुल भिन्न अल्पसंख्यक के रूप में की गई थी। इसलिए कार्यसमिति को यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि ब्रिटिश सरकार के अपनी नीति से दूर हटने के आरोप का यह झूठा और गंदा प्रोपेगंडा है और यह समिति ऐसे प्रचार को अनुसूचित जातियों के शत्रुओं पर छल-कपट से उनके संवैधानिक संरक्षणों के यथोचित दावों को नाकाम करने का कार्य समझती है और भारतीय राजनीतिक नेताओं और मुख्यतः हिंदू नेताओं को बता देना चाहती है कि अस्पृश्यों और हिंदुओं के मध्य शांति और सद्भाव के हितों को ध्यान में रखते हुए तथा भारत के राजनीतिक लक्ष्य को तीव्र गति से प्राप्त करने के लिए इस लक्ष्य को अंगीकार करें।