अनुसूचित जातियों की राजनैतिक मांगें - Page 378

परिशिष्ट

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(2) चकबंदी आयोग के माध्यम से अनुसूचित जातियों को अलग बसाने के लिए सरकारी भूमि का कुछ भाग आरक्षित किया जाए।

(3) अनुसूचित जातियों की आवश्यकताओं, उनकी जनसंख्या तथा उनके महत्वपूर्ण अस्तित्व के अनुसार, निम्नलिखित संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व निश्चित किया जाएंःµ

(क) विधान सभाओं में।

(ख) कार्यपालिका में।

(ग) नगर पालिकाओं और स्थानीय निकायों में।

(घ) सरकारी नौकरियों में।

(ड.) लोक सेवा आयोगों में।

(4) उपरोक्त प्रावधानों को मौलिक अधिकारों की संज्ञा दी जाए, जिससे विधान सभाएं अथवा कार्यपालिकाएं, इनसे संशोधन करने या इन्हें बदल डालने के लिए सक्षम न हों।

(5) भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 156 के अंतर्गत नियुक्त किए जाने वाले महालेखापरीक्षक के स्तर के अधिकारी की नियुक्ति के लिए प्रावधान किया जाए, जो उपरोक्त मौलिक अधिकारों के कार्यान्यवन की समीक्षा करे और उसे उन्हीं सूरतों में हटाया जा सके, जिन सूरतों में संघीय न्यायालय का न्यायाधीश हटाया जाता है।

संकल्प संख्या - 4

विषयःµ सांप्रदायिक समझौते।

भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्य समिति, जो सांप्रदायिक समस्या को शीघ्र हल करना चाहती है, हिंदुओं और मुसलमानों के मध्य समझौता कराने के लिए श्री गांधी और श्री जिन्ना के बीच चल रही गुप्त समझौता वार्ताओं की भर्त्सना करती है। कार्य समिति का विचार है कि सांप्रदायिक समझौते का ऐसा खंडित स्वरूप प्रत्येक दशा में हानिकारक है। यह इसलिए हानिकारक है कि इससे अन्य समुदायों में यह संदेह उत्पन्न होता है कि उनके हितों को हानि पहुंचाने के लिए दो समुदायों में बेइमानी की साठगांठ हो रही है। यह देश के सामान्य हित में भी हानिकारक है, क्योंकि इसके द्वारा एक वर्ग विशेष को दूसरों से अलग करके विशेष रूप से प्रतिष्ठित किया जा रहा है, इसके संरक्षण की दृष्टि से नहीं बल्कि प्रतिष्ठा की हैसियत से दर्जा दिया जा