अनुसूचित जातियों की राजनैतिक मांगें - Page 379

364 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रहा है, जो सभी के लिए समान अधिकार के सिद्धांतों की दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है, उसकी निंदा की जानी चाहिए। कार्य समिति को आश्चर्य है कि श्री गांधी जो सार्वजनिक जीवन में गोपनीयता का सदा विरोध करते रहे हैं, अपने स्वयं के सिद्धांत को तिलांजलि देकर हिंदू-मुस्लिम एकता के नाम पर गोपनीय कूटनीति में दाखिल हो गए। यह समिति इस बात पर बल देती है कि सांप्रदायिक प्रश्न के समाधान की प्रक्रिया पर जिसमें सबको उचित तथा समान न्याय मिल सके, विचार किया जाना तभी संभव है, जब सभी वर्गों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सबकी मांगों पर सार्वजनिक रूप से विचार विमर्श हो।

संकल्प संख्या - 5

विषयःµ संविधान समीक्षा।

भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्य समिति का यह विचार है कि भारत के वर्तमान संविधान (भारत सरकार अधिनियम 1935) में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रावधान किसी स्पष्ट सिद्धांत पर आधारित नहीं हैं। समिति को लगता है कि जो व्यवस्था इस समय है उसके अनुसार कुछ अल्पसंख्यक समुदायों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, जबकि अन्य अल्पसंख्यकों को उनकी जनसंख्या के अनुपात से कहीं अधिक प्रतिनिधित्व उनके ऐतिहासिक एवं सैनिक महत्व के आधार पर दिए गए दावों के कारण दिया गया है। समिति ऐसे दावों को मान लेना अन्य अल्पसंख्यकों के हितों के विरुद्ध मानती है, और उन्हें सामाजिक और राजनीतिक लोकतंत्र के आदर्श के विरुद्ध मानती है, जो भारत का लक्ष्य है और उन्हें कदापि सहन नहीं किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में समिति इस विषय पर ध्यान दिलाना चाहती है कि विशेष रूप से चुने हुए अल्पसंख्यकों को मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट पर साइमन कमीशन में रद्द कर दिया गया था। कमेटी मांग करती है कि चूंकि भारत का भावी संविधान भारतीयों के लिए होगा, इसलिए संविधान बनाते समय अल्पसंख्यकों से संबंधित व्यवस्थाओं में ऐसा संशोधन किया जाए, जिसे सभी अल्पसंख्यकों को समानता के सिद्धांत पर अधिकार मिल सके।

संकल्प संख्या - 6

विषयःµ विधान सभाओं तथा कार्यपालिकाओं में प्रतिनिधित्व।

भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्य समिति चाहती है कि यह स्पष्ट तौर पर बल देकर कहा जाए कि प्रतिनिधित्व के मामले में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच पक्षपात सहन नहीं किया जाएगा और प्रांतीय तथा केंद्रीय विधानमंडलों और प्रांतीय