अनुसूचित जातियों की राजनैतिक मांगें - Page 380

परिशिष्ट

365

तथा केंद्रीय कार्यपालिका में उसी आधार पर प्रतिनिधित्व निश्चित किया जाए और वही सिद्धांत लागू किया जाए, जो मुसलमानों पर लागू हो।

संकल्प संख्या - 7

विषयःµ मतदान पद्धति।

भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्यसमिति का विचार है कि भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत हुए पिछले चुनावों के अनुभवों से सिद्ध हो गया है कि संयुक्त निर्वाचन प्रणाली के आधार पर चुनाव लड़ने के कारण अनुसूचित जातियां विधान सभाओं में अपने सही एवं प्रभावशाली प्रतिनिधियों को भेजने के अधिकार से वंचित रही है और उसमें सवर्ण हिंदुओं को अनुसूचित जातियों में ऐसे सदस्यों को नामजद कर भेजने का अधिकार मिला था, जो सवर्ण हिंदुओं की ही कठपुतली बनने को तैयार रहते थे। इसलिए इस समिति की यह पुरजोर मांग है कि संयुक्त निर्वाचन प्रणाली तथा सुरक्षित सीटों की प्रणाली समाप्त कर अस्पृश्यों के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली लागू की जाए।

संकल्प संख्या - 8

विषयःµ कार्यकारी सरकार का स्वरूप।

भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्य समिति इस तथ्य की ओर संकेत करना चाहती है कि बहुसंख्यक समुदाय के हाथों में केवल धन संपत्ति, व्यापार एवं उद्योग ही नहीं है, वरन् राज्य का सारा प्रशासन ऐसे बहुसंख्यक समुदाय द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है, जिसके सदस्यों ने पदों पर तथा छोटे-छोटे पदों पर एकाधिकार जमा रखा है। यह समिति इस स्थिति को अल्पसंख्यकों के हितों के लिए बहुत बड़ा खतरा समझती है, क्योंकि इससे बहुसंख्यक समाज को अल्पसंख्यकों पर पूरा आधिपत्य जमाने का अधिकार मिलता है। भारत सरकार अधिनियम, 1935 में कार्यकारी सरकार के संबंध में, जो संवैधानिक प्रावधान किए गए हैं, उनसे ऐसी खतरनाक शक्ति को प्रोत्साहन मिला है, जिसके अंतर्गत विधानसभाओं में अल्प संख्यकों की भावनाओं की परवाह किए बिना सरकार बनाने का अधिकार मिल जाता है।

यह समिति समझती है कि जब तक इनका कोई और विकल्प नहीं निकलता, तब तक शासन की संसदीय प्रणाली तो अपनानी ही पड़ेगी। यह समिति ऐसे संसदीय मंत्रिमंडल के पूर्णतया विरुद्ध है, जिसमें कार्यकारी अधिकार खुद-ब-खुद बहुसंख्यक समुदाय को मिल जाएं, ऐसी व्यवस्था में सभी अधिकार बहुसंख्यक समुदाय में निहित हो जाएंगे और बहुसंख्यकों की सत्ता और सुदृढ़ हो जाएगी, जिससे अल्पसंख्यकों को खतरा पैदा होगा। कार्यसमिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि संसदीय मंत्रिमंडल