366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
व्यवस्था भारतीय परिस्थितियों से मेल नहीं खाती, इसलिए इससे भिन्न व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके अनुसार कार्यकारी सरकार अल्पसंख्यकों में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना बनाए रख सकें। इसलिए कार्य समिति इस बात पर बल देती है कि सभी प्रांतीय तथा केंद्रीय सरकारों में कार्यकारी सरकार का निम्नलिखित ढंग से गठन किया जाना चाहिएःµ
(1) सरकार में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रीगण सामान्य समुदाय तथा अल्पसंख्यक समुदायों से संविधान द्वारा निर्धारित अनुपात में लिए जाएं।
(2) सामान्य समुदाय से लिए गए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रीगण का निर्वाचन पूरे सदन द्वारा एकल हस्तांतरणीय मत से किया जाए।
(3) अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्रीगण विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा एकल हस्तांतरणीय मत से चुने जाएं।
(4) सरकार के मंत्रीगण विधान सभाओं के सदस्य ही हों, जो प्रश्नों के उत्तर देंगे, मतदान में भाग लेंगे तथा बहसों में भाग लेंगे।
(5) सरकार में मंत्री का कोई स्थान खाली होने पर उस स्थान की पूर्ति मूल नियुक्ति के नियमों के अनुसार की जाएगी।
(6) सरकार का कार्यकाल विधान सभा के कार्यकाल के बराबर तथा साथ-साथ समाप्त होगा।
संकल्प संख्या - 9
विषयःµ सरकारी सेवाएं।
यह वांछनीय है कि कोई भी सरकार व्यक्तियों की नहीं, वरन् कानून की सरकार हो और उसका संचालन कानून के अनुसार हो, परंतु इस तथ्य की उपेक्षा नहीं की जा सकती कि सरकारी तंत्र का संचालन व्यक्तियों द्वारा ही होता है। ऐसी दशा में सरकार चाहे अच्छी हो अथवा बुरी, उस सरकार का निष्पक्ष और निरपेक्ष होना बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि सरकारी तंत्र का संचालन करने वाले व्यक्ति किस सीमा तक निष्पक्ष न्यायप्रिय तथा निरपेक्ष है। भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्य समिति की यह धारणा है कि इस वर्तमान शासन व्यवस्था से, जो जातिवादी, संकुचित मनोवृत्ति, न्याय भावना विहीन तथा अनुसूचित जातियों से घृणा करने वालों के द्वारा नियंत्रित एवं संचालित हो अस्पृश्यों की सुरक्षा, न्याय अथवा सहानुभूति कभी नहीं हो सकती। इसलिए कार्य समिति यह मांग करती है कि संविधान द्वारा इस बात की पुष्टि अवश्य कर दी जानी चाहिए कि सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों को