अनुसूचित जातियों की राजनैतिक मांगें - Page 382

परिशिष्ट

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उसी अनुपात में आरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए, जिस अनुपात में मुस्लिम समुदाय को स्वीकार किया जाए।

संकल्प संख्या - 10

विषयःµ शिक्षा के लिए प्रावधान।

भारतीय परिगणित जाति संघ की कार्य समिति अनुभव करती है कि जब तक अनुसूचित जातियों के लोग प्रशासन में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने के योग्य नहीं हो जाते, तब तक अनुसूचित जातियों को वही मुसीबतें उठानी पड़ेंगी, जो अन्याय और अपमान सरकार और जनता द्वारा आज तक उन पर किया जाता रहा है। इसीलिए कार्य समिति अनुसूचित जातियों में उच्च शिक्षा के प्रसार को नितांत आवश्यक और महत्त्वपूर्ण समझती है। परंतु इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ऐसे उच्च स्तर की शिक्षा गरीब अनुसूचित जातियों के वश की बात नहीं है। इसलिए समिति यह आवश्यक समझती है कि अस्पृश्यों को उच्च शिक्षा के साधन सुलभ कराना राज्य का दायित्व माना जाए, जो इस काम के लिए वित्तीय व्यवस्था करें। यह समिति मांग करती है कि संविधान द्वारा प्रांतीय सरकारों तथा केंद्रीय सरकार पर यह दायित्व निश्चित कर दिया जाए कि वे अनुसूचित जातियों की उच्च शिक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष बजट में एक निश्चित धनराशि विशेष रूप से नियत करे और इस मद को प्राथमिकता दी जाए।

संकल्प संख्या - 11

विषयःµ अनुसूचित जातियों की पृथक बस्तियां।

भारतीय दलित संघ की कार्यसमिति का विचार है किःµ

(अ) जब तक अनुसूचित जातियों के लोग इस दयनीय दशा में कि हिंदू

गांवों के बाहर तिरस्कृत लोगों की भांति रहने पर विवश हैं जहां उन्हें अपनी

जीविका का कोई साधन प्राप्त नहीं होता और हिंदूओं की अपेक्षा बहुत कम

संख्या में हैं, वे अस्पृश्य ही बने रहेंगे और सदैव हिंदुओं के आतंक और

दमन के शिकार होते रहेंगे तथा स्वतंत्र जीवन निर्वाह न कर सकेंगे।

(ब) सवर्ण हिंदुओं के दमन और अत्याचार, जिनमें स्वराज के बाद और

बढ़ोतरी हो जाएगी, उनसे अनुसूचित जातियों की सुरक्षा के लिए तथा उनके

पूर्ण विकास के लिए आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए और

अस्पृश्यता निवारण का मार्ग प्रशस्त किया जाए। समिति यह मांग करती है

कि भावी संविधान में निम्नलिखित प्रावधान किए जाएंःµ