2. तुच्छ प्रदर्शन - Page 39

24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्दलित वर्गों के काम के लिए योजना बनाने हेतु अग्रिम राशि की व्यवस्था

करने संबंधी स्वामी श्रद्धानंद जी का दिनांक 8 जून, 1922 का पत्र पढ़ा

गया। प्रस्ताव पारित किया गया। श्री गंगाधर राव बी. देशपांडे को तत्प्रयोजनार्थ

गठित उपसमिति का संयोजक नियुक्त किया जाए और उनसे अनुरोध किया

जाए कि वे शीघ्र ही बैठक बुलाएं और यह प्रस्ताव भी पारित किया गया

कि स्वामी श्रद्धानंद का पत्र उपसमिति को भेज दिया जाए।य्

इस दिलचस्प प्रस्ताव के इतिहास में समिति का गठन दूसरा चरण माना जाता है। समिति के गठन संबंधी प्रस्ताव का कांग्रेस कार्यसमिति की जुलाई 1922 में बम्बई में आयोजित बैठक के कार्यवाही वृत्तांत में पुनः उल्लेख मिलता है। उस बैठक में समिति ने निम्नलिखित प्रस्ताव पास किया था µ

फ्कि महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) से अनुरोध किया जाए कि वह स्वामी

श्रद्धानंद से अपने त्यागपत्र पर पुनर्विचार करने और उसे वापस लेने के लिए

अनुरोध करें और डिप्रेस्ड क्लासेस उपसमिति के आकस्मिक व्यय को पूरा करने

हेतु संयोजक श्री जी.बी. देशपांडे को 500 रुपए की राशि दे दी जाए।य्

जहां तक वर्ष 1922 का संबंध है, बात यहीं पर समाप्त हो गई। ऐसा प्रतीत होता है कि इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं हुआ। वर्ष 1923 आरंभ हो गया। यह अनुभव करते हुए कि अस्पृश्यों के उत्थान तथा उनकी दशा सुधारने की योजना पर कोई अमल नहीं किया गया, जनवरी 1923 में गया में आयोजित अपनी बैठक में कार्यसमिति ने निम्नलिखित प्रस्ताव पास किया µ

फ्स्वामी श्रद्धानंद के त्यागपत्र के संदर्भ में समिति संकल्प करती है कि

डिप्रेस्ड क्लासेस उपसमिति के शेष सदस्य समिति का गठन करेंगे और श्री

याज्ञनिक उसके संयोजक होंगे।य्

तत्पश्चात् अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की 1923 में बम्बई में आयोजित बैठक में निम्नलिखित प्रस्ताव पास किया गया µ

फ्प्रस्ताव पारित किया जाता है कि अस्पृश्यों की स्थिति से संबंधित मामले

को आवश्यक कार्यवाही हेतु कार्यसमिति को भेज दिया जाए।य्

इस प्रकार अस्पृश्यों की दशा से संबंधित मामले को विशेष समिति (स्पेशल कमेटी) को भेजने के प्रस्ताव से इतिहास का दूसरा चरण समाप्त हो जाता है। इसके बाद इतिहास का तीसरा चरण उस समय आरंभ हुआ जब मई 1923 में बम्बई में आयोजित कार्यसमिति की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गयाः