2. तुच्छ प्रदर्शन - Page 40

तुच्छ प्रदर्शन

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फ्प्रस्ताव पारित किया जाता है कि जबकि कांग्रेस की नीतियों के अनुसरण में

अस्पृश्यों की दशा में कुछ सुधार हुआ है फिर भी यह समिति इस बात के

प्रति सचेत है कि इस दिशा में अभी बहुत कुछ करना बाकी है और जहां

तक अस्पृश्यता के प्रश्न का संबंध है, यह समिति हिंदू समाज विशेषकर

अखिल भारतीय हिंदू महासभा से अनुरोध करती है कि वह इस समस्या को

अपने हाथ में ले और हिंदू समाज से इस कलंक को मिटाने के लिए जी

तोड़ प्रयत्न करे।य्

प्रस्ताव के आरंभ और अंत की यह दुखद गाथा है। अत्यधिक धूमधड़ाके से आरंभ किए गए प्रस्ताव की गाथा का ऐसा निर्लज्ज समापन!

इससे यह स्पष्ट है कि कांग्रेस ने अस्पृश्यों की समस्या से किस प्रकार अपना हाथ खींच लिया। अपने दायित्व को हिंदू महासभा पर थोपना जले पर नमक छिड़कने से अधिक और कुछ नहीं हो सकता। अछूतोद्धार के लिए हिंदू महासभा की अपेक्षा और कोई संस्था उस कार्य के लिए उपयुक्त नहीं समझी गई। अस्पृश्यों की समस्या का समाधान करने में सबसे अधिक अयोग्य अगर कोई संस्था है तो वह हिंदू महासभा ही है। इसका लक्ष्य एवं उद्देश्य केवल हिंदू धर्म एवं हिंदू संस्कृति की रक्षा करना ही था। यह लड़ाकू हिंदू संगठन है। यह समाज सुधार संस्था नहीं है। यह पूर्णतया राजनैतिक संस्था है जिसका मुख्य लक्ष्य एवं उद्देश्य भारतीय राजनीति में मुसलमानों के प्रभाव को समाप्त करना है। राजनैतिक शक्ति का संचय करने के लिए यह सामाजिक एकता को कायम रखना चाहती है और सामाजिक एकता को बनाए रखने का अर्थ जाति अथवा अस्पृश्यता के विषय में कोई बात नहीं करना था। तब अस्पृश्यों के हित में काम करने के लिए हिंदू महासभा को कांग्रेस द्वारा क्यों चुना गया, यह बात मेरी समझ से बाहर है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस अस्पृश्यों की असुविधाजनक समस्या से अपना पिंड छुड़ाना चाहती थी। हिंदू महासभा ने निःसंदेह अस्पृश्यों की समस्या का कार्य अपने हाथों में नहीं लिया क्योंकि उसे इसमें कोई रुचि नहीं थी और केवल इसलिए कि कांग्रेस ने बिना कोई वित्तीय व्यवस्था किए केवल पावन प्रस्ताव पास कर दिया था। अतः इस योजना की ऐसी भद्दी और घृणित परिणति हुई।

इस अध्याय को समाप्त करने से पहले इस बात पर विचार करना असंगत न होगा कि कांग्रेस ने अस्पृश्यों की सामाजिक उन्नति के जो डंके पीछे बजाए थे उसे उसने क्यों त्यागा? क्सा ऐसा इसलिए किया गया कि स्वामी श्रद्धानंद को इस विशाल समस्या से निपटने की अनुमति देने के बजाए जिसे कांग्रेस न तो स्वीकार सकती थी और न ही रद्द, कांग्रेस अस्पृश्यों के लिए दो से पांच लाख रुपए से अधिक खर्च