392 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस प्रश्न का गहन अध्ययन करने के बाद ब्रिटिश सरकार सोचती है कि जो योजना सामने रखी गई है, वर्तमान संविधान के अंतर्गत ही काफी प्रगति लाई जा सकती है............
ब्रिटिश सरकार अनुभव करती है कि सभी ओर से सद्च्छा एवं सहयोग होना आवश्यक है। ये प्रस्ताव ब्रिटिश सरकार तथा भारतीय लोगों के संयुक्त प्रायास से स्वायत्तशासी भारत की ओर बढ़ने का एक कदम हो सकता है। और भारत को अच्छी स्थिति में शक्तिशाली बनने तथा अन्य सभी राष्ट्रों के समकक्ष गौरवान्वित करने में सहायक हो सकता है।
(2) नई दिल्ली में दिनांक 14 जून, 1945 को महामहिम वायसराय द्वारा दिया गया भाषणःµ
वर्तमान राजनीतिक स्थिति एवं भारत की पूर्ण स्वायत्ता के लक्ष्य की ओर भारतीयों को आगे बढ़ने की दिशा में सहायक होने के लिए जो प्रस्ताव बनाये गये हैं, भारतीय राजनीतिक नेताओं के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मुझे अधिकृत किया है। इस समय इन प्रस्तावों पर भारत सचिव संसद में स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। इस घोषणा द्वारा उन प्रस्तावों को आपके सामने स्पष्ट करना है और इसके पीछे सरकार का क्या विचार है और किस ढंग से इन प्रस्तावों को लागू करना है यह स्थिति भी स्पष्ट करनी है।
संवैधानिक समझौते को लागू करने के लिए यह प्रयत्न नहीं किया जा रहा है। ब्रिटिश सरकार को आशा थी कि भारतीय पार्टियों में नेतागण साम्प्रदायिक समस्या, जो एक बड़ा रोड़ा है, को हल करने की दिशा में किसी समझौते पर स्वयं सहमत हो जायेंगे, परन्तु यह आशा पूरी नहीं हुई।
इस समय भारत को बड़ी समस्याएं हल करनी हैं, जिसके लिए सभी दलों के नेताओं के सामान्य सहयोग की आवश्यकता है। इसलिए मैं ब्रिटिश सरकार के समर्थन के साथ भारत के केंद्रीय एवं प्रांतीय स्तर के सभी नेताओं को नई एक्जीकयूटिव काउंसिल का गठन करने के लिए उनके साथ परामर्श करने के लिए मैं आमंत्रित करता हूं। नई प्रस्तावित काउंसिल में सभी प्रमुख समुदायों के प्रतिनिधि होंगे और हिंदुओं तथा मुसलमानों का अनुपात में प्रतिनिधित्व होगा। यदि काउंसिल का गठन हो जाता है, तो वह काउंसिल वर्तमान संविधान के अंतर्गत कार्य करेगी। परन्तु यह पूर्णतया भारतीय काउंसिल होगी। केवल वायसराय और कमांडर-इन-चीफ को छोड़कर, जो युद्ध सदस्य के रूप में अपनी स्थिति बनाये रखेंगे। यह भी प्रस्तावित किया जाता है कि विदेशी मामलों का विषय, जो अभी तक वायसराय के पास था, जो अब काउंसिल के भारतीय सदस्यों को सौंप दिया जाये।