3. तुच्छ चालें - Page 66

तुच्छ चालें

3. बहिष्कार करने के लिए भड़काने अथवा बढ़ावा देने पर दंड

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जो व्यक्ति किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के बहिष्कार के लिएः

(क) सार्वजनिक रूप से कोई प्रस्ताव रखता है या प्रकाशित करता है या

परिचालित करता है अथवा

(ख) उक्त आशय से कोई वक्तव्य देता है या अफवाह फैलाता है या उसे

प्रकाशित या परिचालित करता है अथवा

(ग) किसी और तरीके से उक्त बहिष्कार के लिए भड़काता है या बढ़ावा देता

है, वह पांच वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों के दंड का भागी

होगा।

व्याख्या - उपरोक्त रीति से किए गए किसी कार्य से प्रभावित व्यक्ति या वह व्यक्ति जिसके प्रभावित होने की संभावना हो, का नाम या किसी प्रकार का उल्लेख न भी किया गया हो, परंतु उसके कार्यों का परोक्ष उल्लेख किया गया हो, तो भी इस धारा के अधीन अपराध किया गया समझा जाएगा।

4. बहिष्कार करने की धमकी दंडनीय

कोई मनुष्य जो कोई कार्य करने के लिए कानूनन अधिकृत है और वह उसे करता है अथवा ऐसे किसी काम को जिसके लिए वह बाध्य नहीं है, तो उससे जो व्यक्ति जोर-जबरदस्ती अनधिकृत काय्र कराएगा अथवा अधिकृत कार्य से वंचित करेगा या बहिष्कार करने की धमकी देगा तो उसे कैद की सजा मिलेगी, जो पांच वर्ष तक की होगी या उसे जुर्माना देना होगा अथवा सजा और जुर्माना दोनों भुगतने होंगे।

अपवाद - उसे बहिष्कार नहीं माना जाएगा।

(1) मान्यताप्राप्त श्रम विवाद पर कार्रवाई।

(2) व्यापारिक प्रतियोगिता के दौरान की गई कार्रवाई।

टिप्पणी - ये सभी अपराध संज्ञेय समझे जाएंगे।

शर्त संख्या - 3

भेदभाव के विरुद्ध संरक्षण

दलित वर्गों के लोग भविष्य में व्यवस्थापिका द्वारा कानून बनाने अथवा कार्यपालिका द्वारा भेदभावमूलक आदेश जारी करने के बारे में आशंकित हैं। इसलिए वे बहुसंख्यक शासन को तब तक स्वीकार नहीं करेंगे, जब तक कि संवैधानिक रूप से व्यवस्थापिका द्वारा या प्रशासन में दलितों के विरुद्ध भेदभावमूलक नियम बनाने या आदेश जारी करने को असंभव नहीं बना दिया जाता।