52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इसलिए यह प्रस्ताव किया जाता है कि भारत के सांविधिक कानून में निम्नलिखित स्थाई प्रावधान कर दिए जाएं µ
फ्सारे भारत में कोई भी व्यवस्थापिका अथवा कार्यपालिका कोई भी ऐसे कानून नहीं बना सकती अथवा आदेश पारित नहीं कर सकती अथवा कोई नियम अथवा विनियम नहीं बना सकती, जिनसे राज्य की जनता के अधिकारों का उल्लंघन होता हो तथा भारत भूमि पर कहीं भ्ी पूर्व प्रचलित विषमता अथवा अस्पृश्यतामूलक रीतियों की झलक मिलती हो। इसमें µ
(1) ठेके लेना-देना, मुकदमें दायर करना, पक्षकार बनना, गवाही देना, पैतृक संपत्ति प्राप्त करना, जायदाद बेचना, खरीदना, पट्टे पर जमीन लेना आदि का प्रावधान किया जाए।
(2) सिवाए उन हालात के जहां किसी को वंचित रखना आवश्यक हो दलितों को नागरिक एवं सैनिक सेवाओं में भर्ती, शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश की व्यवस्था की जाए।
(3) सराय होटलों में ठहरना, शैक्षिक संस्थाओं में भर्ती, नदियों के जल का उपयोग करना, झरनों, कुओं, तालाबों, सामान्य सड़कों, गलियों, सभी प्रकार की सवारियों चाहे वह धरती, जल अथवा आसमान पर हों, का उपयोग करना, सिनेमा, थिएटर आदि सभी सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करना और सभी प्रकार के अधिकार अन्य नागरिकों की भांति जाति, रंग, धर्म अथवा वर्ग का भेदभाव किए बिना पूर्ण अधिकार प्राप्त हों।
(4) बिना किसी प्रकार के भेदभाव किए सभी धार्मिक स्थानों - जो उस धर्म के लोगों के लिए सार्वजनिक रूप से खुले होंगे, अछूतों के लिए भी खुले रहेंगे।
(5) अन्य लोगों के समान अस्पृश्यों को न्यायालय में समान अधिकार, अन्य अधिकारों तथा उनकी जायदाद की सुरक्षा की गारंटी बिना पूर्व शर्त के दी जाएगी, जिससे उन्हें दंड देने, सताए जाने या जुर्माने की आशंका हो।
शर्त संख्या - 4
विधान-मंडलों में समुचित प्रतिनिधित्व
दलित वर्गों को अपने कल्याण के लिए विधायिका एवं कार्यपालिका पर प्रभाव डालने के लिए समुचित राजनीतिक शक्ति प्रदान की जाए। इस विचार से वे मांग करते हैं कि चुनाव नियम में निम्नलिखित प्रावधान किए जाएंःµ