54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(2) लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाया नहीं जा सकता, केवल विधायिका ही प्रस्ताव पास करके उसे हटा सकती है। उसे सेवानिवृत्ति के बाद किसी सरकारी नौकरी पर नियुक्त नहीं किया जाएगा।
(3) इसी आयोग का यह भी कर्तव्य होगा कि वह निर्धारित योग्यता के लिए परीक्षाओं का आयोजन करके,
(क) इस प्रकार की नौकरियों में भरर्ती की व्यवस्था करे जिसमें सभी
समुदायों को उनका समुचित प्रतिनिधित्व मिला हो, और
(ख) किन्हीं विशेष नौकरियों में विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधित्व को पूरा करने
के लिए युक्तिसंगत प्राथमिकता देने की समय-समय पर व्यवस्था करे।
शर्त संख्या µ 6
पक्षपात अथवा हितों की उपेक्षा को दूर करना
इस बात को देखते हुए कि भविष्य में जब शासन बहुसंख्यक पुरातनपंथी हिंदुओं के हाथ में होगा, दलित वर्गों को आशंका है कि बहुसंख्यक सवर्ण हिंदू उनसे कोई सहानुभूति नहीं दिखाएंगे और संभवतः उनके हितों के प्रति पूर्वाग्रह बरतेंगे तथा उनकी मूलभूत आवश्यकताओं की उपेक्षा करेंगे - जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। संविधान में प्रावधान अवश्य कर दिए गए हैं। विधायिका में दलित वर्ग के लोग अल्पसंख्यक रूप में ही रहेंगे। दलित वर्ग के लोग यह नितांत आवश्यक समझते हैं कि संविधान में उनके हितों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था की जाए। इसलिए प्रस्तावित किया जाता है कि संविधान में निम्नलिखित प्रावधान किए जाएंःµ
(1) भारत की केंद्रीय विधायिका तथा प्रत्येक प्रांतीय विधानसभा और कार्यपालिका अथवा कानून द्वारा गठित अन्य संस्थाओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया जाए कि वे दलित वर्गों के लिए शिक्षा, स्वच्छता, नौकरियों में रखने हेतु उचित कानून बनाएं और कोई ऐसा कार्य न करें जो दलितों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले।
(2) जब कभी किसी भी प्रान्त में अथवा भारत में इन प्रावधानों का उल्लंघन होगा तो काउंसिल के गवर्नर जनरल को प्रान्तीय व्यवस्था तथा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट को केन्द्रीय व्यवस्था के लिए अपील की जा सकेगी।