तुच्छ चालें
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के लिए एक विभाग बनाए, जो नियमों को लागू करके उनकी समस्याएं हल करने के लिए गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में निम्नलिखित धारा को भी जोड़ लें -
संविधान लागू करने के साथ-साथ एक मंत्री के अधीन ऐसा विभाग भी बने, जो दलित वर्गों के हितों और उनके कल्याणों की देखरेख करे।
उस विभाग का मंत्री अपने पद पर तभी तक रहेगा जब तक केंद्रीय व्यवस्थापिका का उस पर विश्वास हो।
उस मंत्री को कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों और कर्तव्यों का पालन ऐसे करना पड़ेगा कि उसको दलित वर्गों के दमन और उनके प्रति सामाजिक अन्याय से उनकी सुरक्षा करते हुए सारे देश में उनके लिए कल्याणकारी कार्य करने का उत्तरदायित्व सौंपा जाए।
गवर्नर जनरल निम्नलिखित नियम बनाने के लिए सक्षम होःµ
(क) दलित वर्गों के कल्याण के संबंध में मंत्री को सभी अथवा कुछ ऐसे
अधिकार अथवा कर्तव्य सौंपना, जिससे वह मंत्री उनकी शिक्षा एवं
स्वच्छता आदि के संबंध में नियम बना सके।
(ब) दलित वर्गों के कल्याण के लिए प्रत्येक प्रान्त में ब्यूरो स्थापित करना,
जो मंत्री के अधीन रहकर कार्य करें और मंत्री को सहयोग करें।
शर्त संख्या µ 8
दलित वर्ग और मंत्रिमंडल
यह आवश्यक है कि सरकारी कार्यकलाप पर प्रभाव डालने हेतु व्यवस्थापिका में उन्हें प्रतिनिधित्व मिले, जिससे कि दलित वर्गों को सरकार की सामान्य नीति निर्धारण करने का अवसर प्रदान किया जा सके। यह तभी संभव है, जब उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। दलित वर्गों के लोग इसीलिए यह दावा करते हैं कि वे साधारणतया अन्य अल्पसंख्यकों के साथ-साथ मंत्रिमंडल में उन्हें भी शामिल करने का नैतिक अधिकार सुनिश्चित किया जाए। इसे ध्यान में रखते हुए दलित वर्गों के लोग प्रस्ताव करते हैं कि गवर्नर-जनरल तथा सभी प्रांतों के गवर्नरों को आवश्यक निर्देश दे दिए जाएं कि वे अपने मंत्रिमंडल में दलित वर्गों को यथोचित प्रतिनिधित्व दें।
II
अस्पृश्यों की उपरोक्त मांगों के संबंध में क्या हुआ और अल्पसंख्यक समिति के सदस्यों की ओर से क्या प्रतिक्रिया हुई, इन सबके संबंध में अल्पसंख्यक समिति ने