तुच्छ चालें
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परंतु अधिक समय तक लोगों को वह यह सोचने से न रोक सके कि इस दिशा में उनकी क्या स्थिति होने जा रही है। सितंबर, 17, 1931 को संघीय ढांचा समिति की जो बैठक हुई, उसमें श्री गांधी के हाथ में एक अवसर था। बैठक की कार्यसूची में संघीय ढांचा समिति के सदस्यों के चुनाव का प्रश्न भी शामिल था। इस विषय में श्री गांधी के निम्नलिखित विचार थे µ
फ्मैं इस उप-शीर्ष (पांच) µ विशेष हितों में विशेष निर्वाचनक्षेत्रों द्वारा
प्रतिनिधित्व पर आता हूं। मैं कांग्रेस के पक्ष में बोलूंगा। कांग्रेस ने हिंदू,
मसलमान, सिख एकता पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए ठोस ऐतिहासिक
कारण हैं परंतु कांग्रेस किसी भी रूप में इस सिद्धांत को जारी नहीं रखेगी।
मैंने विशेष हितों की सूची सुनी है। जहां तक अस्पृश्यों का संबंध है, मैं पूरी
तरह से सही समझ गया था कि डॉक्टर अम्बेडकर क्या कहना चाहते हैं, परंतु
अस्पृश्यों के हित में उसके प्रतिनिधित्व के लिए कांग्रेस डॉक्टर अम्बेडकर
के साथ है। अस्पृश्यों के हित कांगेस के सामने उतने ही स्पष्ट हैं, जितने
पूरे देश के किसी अन्य व्यक्ति को स्पष्ट हो सकते हैं। अतः किसी और
विशेष प्रतिनिधित्व का मैं पूरी ताकत से विरोध करूंगा।य्
यह श्री गांधी द्वारा अछूतों के विरुद्ध कांग्रेस की युद्ध घोषणा के अतिरिक्त कुछ नहीं था। इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस और अस्पृश्यों में संघर्ष शुरू हो गया। श्री गांधी की घोषणा से मुझे मालूम हो गया कि श्री गांधी उस अल्पसंख्यक समिति में क्या करेंगे जिसमें इस मुख्य विषय पर विचार होना था। श्री गांधी की योजना थी कि हिंदू, मुसलमान और सिखों में समझौता कराकर सांप्रदायिक समस्या का पटाक्षेप करते हुए अस्पृश्यों को अलग छोड़ दिया जाए। अल्पसंख्यक समिति की बैठक से पहले ही श्री गांधी स्वयं अकेले ही मुसलमानों से समझौता करने में जुट गए। परंतु कोई समझौता न हो सका। अंततः दिनांक 28 सितंबर, 1931 को जब अल्पसंख्यक समिति की बैठक हुई उसमें श्री अली इमाम ने मुसलमानों के प्रतिनिधि के रूप में बोलते हुए कहा-
फ्मैं व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता कि मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल से कोई समझौता
वार्ता चल रही है। मुझे यह जानने का अवसर नहीं मिला कि इस प्रकार
का कोई प्रस्ताव चल रहा है। ऐसा हो सकता है, जैसा कि मैंने सुना है कि
शायद कोई समझौता हो जाए। पर मैं इस विषय में कुछ नहीं जानता। यदि आप
मुस्लिम राष्ट्रवादी का विचार मुझसे जानने के इच्छुक हैं, तो मैं उसे बतलाने को
तैयार हूं। इसके लिए मैं आपसे थोड़े समय की अनुमति चाहता हूं।य्