तुच्छ चालें
65
दूसरी बात जो मैं कहना चाहता हूं वह यह है कि विभिन्न अल्पसंख्यकों द्वारा पेश किए गए दावे उनके अपने दावे हैं। इनका दूसरे अल्पसंख्यकों के दावों से कोई सरोकार नहीं। इसलिए जो भी समझौता एक अल्पसंख्यक समुदाय कांग्रेस के साथ या दूसरे दल के साथ अल्पसंख्यकों के दावों की अनदेखी करके करेगा, तो जहां तक मेरा संबंध है, मैं उसमें भागीदार नहीं रहूंगा। मुझे इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि किसी विशेष समुदाय को कोई महत्व मिलेगा या नहीं, परंतु मैं स्पष्ट रूप से बता देना चाहता हूं कि महत्व प्राप्त करने का दावा कोई भी करे या कोई भी किसी को महत्व दे परंतु मेरे हिस्से में से छेड़छाड़ करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। मैं यह बात बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं।य्
तदुपरान्त जो हुआ वह कार्यवाही के निम्नांकित उद्धरण से स्पष्ट हो जाएगा -
फ्चेयरमैन - कोई भ्रांति नहीं रह जानी चाहिए। इस समिति के सामने अंतिम रूप से फैसला हो जाना चाहिए और जब अल्पसंख्यकों अथवा समुदायों में कोई विरोधाभास आ जाए, तो उन दलों को चाहिए कि उन विवादास्पद मुद्दों के समाधान के लिए कुछ समय निकाल कर हल कर लें। ऐसा कदम महत्वपूर्ण और आवश्यक सिद्ध होगा, जिसमें आम सहमति पर पहुंचा जा सकता है।
डॉ. अम्बेडकर - मैंने अपनी स्थिति पूर्णतया स्पष्ट कर दी है।
फ्चेयरमैन - डॉ. अम्बेडकर ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और ऐसे ढंग से की है कि उसमें संदेह की कोई गुंजाइश नहीं बची है। वह स्पष्टीकरण इस समिति के समक्ष विचार-विमर्श के समय आ जाएगा। मैं वही कहना चाहूंगा, जिससे हम सभी एक दूसरे के सहयोग से सर्वसम्मत निर्णय पर पहुंच सकें। जो केवल दो या तीन दलों के बीच में ही न हो, बल्कि सर्वसम्मत निर्णय हो।
फ्चेयरमैन - स्थिति यह है कि अब हम कार्यवाही स्थगित करते हैं और बाद में अपनी बैठकें शुरू करेंगे। आपमें से दो अथवा तीन दलों में जब तक समझौता वार्ता चल रही है, हमें दूसरे अल्पसंख्यकों के दावे भी सुनने होंगे। मैं सोचता हूं कि वैसा करना हितकर होगा। इसमें समय बचेगा और इससे उस समरसता की सम्भावना को भी ठेस नहीं पहुंचेगी जो हमारे सिख मित्रों, श्री गांधी तथा सर आगा खां तथा उनके मित्रों के बीच स्थापित हो सकेगी।