66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
फ्डॉ. अम्बेडकर - मैं यह कहना चाहूंगा कि क्या ऐसी उपसमिति
नियुक्त करना संभव नहीं होगा, जिसमें विभिन्न समुदायों के सदस्य हों साथ
में कांग्रेस प्रतिनिधि भी हों, जो स्थगन काल में एक साथ बैठकर समस्या
पर बहस कर लें।
फ्चेयरमैन - मैं यह राय देने जा रहा था। मुझे वैसी समिति नियुक्त
करने के लिए न कहिए_ वरन् स्वयं कीजिए। मैंने आप सबको बैठक के
लिए आमंत्रित किया है। क्या आप लोग अनौपचारिक ढंग से अपने आप
बैठक करके ऐसी वार्तालाप नहीं कर सकते थे, जिससे वहां पर आप जो
बात करेंगे, उससे कोई पृष्ठभूमि उभर कर सामने आए।
फ्डॉ. अम्बेडकर - जैसा आप चाहें।
फ्चैयरमैन - वैसा करना अधिक अच्छा होगा।
स्थगन काल में तीनों पक्षों का आपस में कोई निर्णय नहीं हुआ। इसके पश्चात् पहली अक्तूबर, 1931 में जब अल्पसंख्यक समिति की पुनः बैठक हुई तो श्री गांधी ने कहा µ
फ्प्रधानमंत्री जी पिछली रात महामहिम आगा खां तथा अन्य मुस्लिम मित्रों
से वार्तालाप करने के पश्चात्, हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हम जिस
उद्देश्य से यहां एकत्र हुए हैं, उस निर्णय में एक सप्ताह का स्थगन काल
होना चाहिए। इस विषय में मुझे अपने साथियों से विचार करने को कोई
समय नहीं मिला। वे निस्संदेह मेरे प्रस्ताव से सहमत होंगे।य्
इस प्रस्ताव का समर्थन सर आगा खां ने भी किया। मैं उसका विरोध करने
के लिए उठ खड़ा हुआ। जो कुछ मैंने कहा वह कार्यवाही के निम्नलिखित
उद्धरण से स्पष्ट है µ
फ्डॉ. अम्बेडकर µ धन्यवाद, परंतु पता नहीं है कि आज मैं जिस स्थिति
में हूं, उससे क्या प्रस्तावित समिति में काम करने से मुझे कोई लाभ होगा।
इसका कारण यह है - पहले ही दिन श्री गांधी ने हमें बतलाया था कि
उन्होंने संघीय ढांचा समिति के सामने यह कह दिया है कि वह भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि होने के नाते मुसलमानों और सिखों के अतिरिक्त
किसी अन्य दल को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं। वह एंग्लो-भारतीयों,
दलित वर्गों और भारतीय ईसाइयों को राजनैतिक मान्यता देने के लिए तैयार
नहीं है। मेरे विचार में मैं इस कमेटी में ऐसा कहकर शिष्टाचार का उल्लंघन