68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस अन्तराल का उपयोग केवल हिंदू-मुस्लिम प्रश्नों को सुलझाने के लिए किया गया तो मैं यह जोर देकर कहूंगा कि इस प्रश्न पर स्वयं अल्पसंख्यक समिति को ही विचार करना चाहिए और किसी अन्य अनौपचारिक समिति को इस सांप्रदायिक प्रश्न पर विचार करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
श्री गांधी - फ्प्रधानमंत्री एवं मित्रों। मैं समझता हूं कि हम लोगों ने अपने कार्य की जो रूपरेखा बनाई है, उसके विषय में कुछ लोगों को भ्रम है। मैं सोचता हूं डॉक्टर अम्बेडकर, कर्नल गिडने तथा अन्य मित्रगण, जो कुछ होने जा रहा है, उससे बिना बात परेशान हो रहे हैं। किसी भी वर्ग के राजनैतिक हितों को नकारने वाला मैं कौन होता हूं। यदि मैं एक भी राष्ट्रीय हित की अनदेखी करता हूं तो मैं उस विश्वास के योग्य नहीं हूं जो कांग्रेस ने मुझमें कांग्रेस का प्रतिनिधि होने के नाते प्रकट किया है। निस्संदेह इन विषयों पर मैंने अपने विचार प्रकट किए हैं। मुझे उन्हीं विचारों पर दृढ़ रहना है। प्रत्येक वर्ग के हित की रक्षा करने के बहुत से तरीके हैं। हम सबको मिलकर एक योजना बनाने की कोशिश करनी चाहिए। किसी को अपने विचारों पर बल देने से रोका नहीं जाएगा।
फ्इसलिए मैं नहीं समझता कि किसी को अपने विचार प्रकट करने में किसी प्रकार का भय हो। प्रत्येक को समान अधिकार होगा। मुझे कोई अधिकार नहीं कि मैं किसी परअ पने विचारों को थोपूं। मैंने केवल राष्ट्र हित में अपने विचार प्रकट किए थे और जब-जब अवसर आएगा, मैं अपने विचार पेश करूंगा। उनको स्वीकार करना न करना आप पर निर्भर है। इसलिए कृपया आप लोग अब अपना ध्यान इस ओर लगाएं कि यदि आप सोचते हैं कि इस गोलमेज सम्मेलन में मुंह चढ़ाए बैठे रहने की अपेक्षा एक साथ बैठकर विचार करने का तरीका ठीक है, तो आप इस स्थगन को ही नहीं मानेंगे, बल्कि इन अनौपचारिक बैठकों के लिए मैंने जो प्रस्ताव रखा है, उसमें आप हृदय से सहयोग करेंगे।
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फ्चेयरमैन - अब मैं इसे प्रस्तुत करता हूं। मित्रों, मेरे दिमाग में यह बात स्पष्ट है कि हम समय व्यर्थ नहीं गवाएंगे। अब से अैर दूसरी बैठक होने के अंतराल में जैसा कि श्री गांधी ने कहा, अनौपचारिक बैठकें होंगी और मुझे आशा है कि आप सभी दलों के लोग उस अवसर का लाभ उठाएंगे।य्