3. तुच्छ चालें - Page 85

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

असफलता हाथ लगेगी, तो हम वहीं रुक जाते और इस अपवित्र विवाद से

बचे रहते। यदि हमारे मतभेद गहरे हो गए हैं और यदि वे विदेशी प्रभुत्व के

कारण उभरकर न आते, तो समाधान स्वराज्य संविधान की बुनियाद न रहकर

उसका कलश बन गया होता। मुझे लेशमात्र भी संदेह नहीं कि स्वतंत्रता की

सूर्य किरणों में सांप्रदायिकता का हिमखंड पिघल जाएगा।

फ्इसलिए मेरा सुझाव है कि अल्पसंख्यक समिति अनिश्चित समय के

लिए स्थगित कर दी जाए और संविधान के मूल सिद्धांतों की शीघ्र रचना

की जाए। इस बीच सांप्रदायिक समस्या का सही हल निकालने का अनवरत

प्रयास होना चाहिए। इीससे संविधान निर्माण में कोई रुकावट या बाधा नहीं

आनी चाहिए। हमें अपना ध्यान सब बातों से हटाकर मुख्य कार्य संविधान

निर्माण पर केद्रित करना होगा।

फ्मुझे समिति को यह बताने की जरूरत नहीं कि मेरी असफलता का

अर्थ यह नहीं कि सांप्रदायिक समस्या का सर्वमान्य हल तलाश करने की

सभी आशाएं धूमिल हो गई हैं। मेरी असफलता का अर्थ मेरी घोर पराजय

भी नहीं है। मेरे शब्दकोष में ऐसा शब्द ही नहीं है। मेरी स्वीकारोक्ति का

अर्थ केवल विशेष प्रयत्नों का असफल होना है, जिनके लिए हमें आपने

एक सप्ताह का समय दिया था।

फ्मेरी स्वीकारोक्ति का अर्थ है कि मेरी असफलता जिसे सफलता की

दिशा में एक सीढ़ी मानी जाए और मैं आप सभी से ऐसा करने का आह्वान

करता हूं। सांप्रदायिक समस्या का हल ढूंढने में हमें चाहे जितनी भी असफलता

मिले और गोलमेज सम्मेलन के प्रयत्न विफल हो जाते हैं, तो भी मेरी यह

राय है कि भावी संविधान में यह एक धारा जोड़ दी जाए कि जिन मुद्दों पर

निर्णय लिया जा सकता है उनकी जांच परख की जाए तथा अंतिम निर्णय

देने के लिए एक पंचाट बना दिया जाए।य्

सभी ने बहस के दौरान श्री गांधी के इस आरोप को गलत बताया कि प्रतिनिधि सरकार द्वारा नामजद किए गए थे और वे जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करते थे। मैंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा -

फ्प्रधानमंत्री जी! पिछली रात जब औपचारिक बैठक की समाप्ति के बाद

हम लोग बैठक से विदा हुए थे तो हम सबकी कम से कम यह राय थी

कि जब हम लोग अगली बैठक में शामिल होंगे, तो हममें से कोई भी इस