3. तुच्छ चालें - Page 86

तुच्छ चालें

71

प्रकार का भाषण नहीं देगा, जिसमें आरोप की भावना हो। मुझे यह देखकर अफसोस होता है कि श्री गांधी ने उस आपसी समझौते का गला घोंट दिया। मुझे क्षमा करें, मुझे यह कहने का मौका मिला है कि श्री गांधी ने वहीं से अपनी बात आरंभ की जो उनकी नजर में असफलता का कारण था। अब मैं अपने विचार से वही बातें बताता हूं, जिन्हें मैं औपचारिक बैठक में किसी समझौते पर पहुंचने की असफलता का कारण समझता हूं। मैं उन पर यहां पर बहस नहीं करना चाहता। अल्पसंख्यक समिति की बैठक अनिश्चित काल तक स्थगित करने के प्रस्ताव में श्री गांधी की जो बातें मुझे कुछ खटकीं वह ये थीं कि उन्होंने अपनी सीमाएं लांघीं, उन्होंने अपने को अपनी स्थिति में सीमित नहीं रखा, उन्होंने विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधियों पर, जो यहां गोलमेज सम्मेलन में बैठे हैं, छींटाकशी की। श्री गांधी ने कहा था कि सभी प्रतिनिधि सरकार द्वारा नामजद किए गए हैं और वे अपने संबंधित समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते। हम इस बात से इंकार नहीं करते हैं कि हम सरकार द्वारा नामजद किए गए हैं, परंतु जहां तक मेरा संबंध है, इस बात में तनिक भी संदेह की गुंजाइश नहीं कि यदि इस सभा के लिए दलित वर्गों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर दिया जाता, तो निश्चय ही मैं ही यहां चुनकर आता। प्रश्न यह नहीं है कि मैं सरकार द्वारा नामजद किया गया हूं अथवा नहीं। मैं अपने उस समुदाय का पूर्णरूपेण प्रतिनिधित्व करता हूं। इसमें किसी को कोई शक नहीं रहना चाहिए।

फ्महात्मा गांधी सदा से इस बात का दावा करते रहे हैं कि दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व कांग्रेस करती है और इतना जोरदार प्रतिनिधित्व करती है जितना मैं तथा मेरे साथी नहीं कर सकते। इस दावे के विषय में मैं इतना ही कह सकता हूं कि यह एकदम झूठा और गैरजिम्मेदाराना दावा है और इस दावे से संबंधित लोग इससे सर्वथा इंकार करते हैं।

फ्मुझे अल्मोड़ा जिले के दलित वर्ग संघ के अध्यक्ष का तार मिला। मैं समझता हूं, वह संयुक्त प्रांत में है, जहां से मेरा कोई परिचय नहीं है और कभी मैं वहां गया भी नहीं हूं। वह तार इस प्रकार है -

फ्यह सभा कांग्रेस में अपने अविश्वास की घोषणा करती है और उसने देश के अंदर और बाहर जो रवैया अख्तियार किया है तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा जो हथकंडे अपनाए गए हैं, उनकी भर्त्सना करती है।य्