3. तुच्छ चालें - Page 89

74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्उस समय तुरंत उस पर विचार करने का समय नहीं था। मैं समझता

हूं, मुझे दिया गया वह समझौता पत्र कमेटी के अधिवेशन में अधिकृत रूप

में रखा जाए और इसके लिए मैं आगा खां से जवाब देने के लिए कहूंगा

कि वह उस समझौता पत्र को यहां प्रस्तुत करें।य्

आगा खां उठ खड़े हुए और बोले µ

फ्प्रधानमंत्री मैं मुसलमानों, दलित वर्गों, एंग्लो इंडियनों, यूरोपियनों और भारतीय

ईसाइयों की ओर से यह समझौता प्रस्तुत करता हूं, जिसमें वे सभी लोग

सांप्रदायिक समस्या का हल निकालने में सफल हुए, जो गोलमेज सम्मेलन

के सांप्रदायिक समिति से संबंधित हैं। हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि

इस कठिन और जटिल प्रस्ताव पर यह समझौता बहुत सोच विचारकर किया

गया है और इसे संपूर्ण रूप में लिया जाना चाहिए। इस समझौते के सभी

अंश एक दूसरे के पूरक हैं।य्

यह दस्तावेज अल्पसंख्यक समझौता ख्1, (माइनॉरिटीज़ पैक्ट) के नाम से प्रसिद्ध है। निस्संदेह श्री गांधी जी के भाषण ने सबका ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। इस समझौते से श्री गांधी बिफर उठे। वह अल्पसंख्यक समझौता प्रस्तुत करने और विशेषकर अछूतों को पृथक राजनीतिक अधिकारों पर मान्यता मिल जाने के कारण, आग-बबूला हो गए। श्री गांधी ने जो कहा वह इस प्रकार था µ

फ्मैंने जो कुछ पहले कहा था, उसे दोहराना चाहता हूं कि हिंदुओं, मुसलमानों

और सिखों को जो समझौता मान्य होगा कांग्रेस उसे हमेशा स्वीकार करेगी।

कांग्रेस किन्हीं अन्य अल्पसंख्यक संप्रदायों के विशेष निर्वाचन को स्वीकार

नहीं करेगी। दो शब्द तथाकथित अस्पृश्यों के विषय में कहना चाहूंगा कि

दूसरे अल्पसंख्यकों के अधिकारों को मैं समझता हूं, परंतु अस्पृश्यों के बारे

में जो बातें की गई हैं, वह हम सबका अंग भंग है। इससे जन्म-जन्मांतर

तक विभाजन की रेखा खिंच जाएगी। मैं अस्पृश्यों के महत्वपूर्ण हितों का

सौदा नहीं करूंगा, चाहे भारत की स्वतंत्रता भी दाव पर लगी हो। मैं अपने

आपको व्यक्तिगत रूप में अस्पृश्यों की बहुसंख्या का एकमात्र प्रतिनिधि होने

का दावा करता हूं। मैं यहां पर केवल कांग्रेस की ओर से ही नहीं बोल रहा

हूं, वरन् अपनी ओर से भी बोल रहा हूं और मेरा दावा है कि यदि अस्पृश्यों

में जनमत संग्रह कराया जाए, तो उनके मत मुझे मिलेंगे और मेरा स्थान शीर्ष

  1. यह परिशिष्ट तीन में शामिल है।