3. तुच्छ चालें - Page 90

तुच्छ चालें

75

पर होगा। मैं भारत के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अस्पृश्यों से कहूंगा कि पृथक निर्वाचन प्रणाली तथा उनके लिए पृथक आरक्षण उनके इस कलुषित अलगाव को मिटाने का सही तरीका नहीं है। यह उन्हीं के लिए लज्जा की बात नहीं है, वरन् कट्टठ्ठर हिंदुओं के लिए भी लज्जाजनक है।

फ्यह समिति और सारी दुनिया समझ ले कि आज हिंदू सुधारकों की एक संस्था है, जो अस्पृश्यता के कलंक को मिटाने का प्रण ले चुकी है। हम नहीं चाहते हैं कि सरकारी कागजात पर तथा जनगणना में अस्पृश्यों का पृथक वर्ग दर्शाया जाए। सिख लोग जैसे हैं, निरंतर बने रहें, मुसलमान और यूरोपियन लोग भी। क्या अस्पृश्य भी निरंतर अस्पृश्य बने रहेंगे? मैं आगे और स्पष्ट कहूंगा कि अस्पृश्यता बनी रहने की अपेक्षा हिंदू धर्म का नामोनिशान मिट जाना बेहतर होगा। अतः डॉक्टर अम्बेडकर की आकांक्षा है कि अस्पृश्यों की उन्नति होने के लिए, सम्मान प्रदर्शन करते हुए, मैं उनकी भावना और योग्यता का सम्मान करता हूं परंतु यहां मैं विनम्रतापूर्वक कहूंगा कि उन्होंने गलत दिशा में सिर खपाया है। उन्हें जो कटु अनुभव हुए हैं, शायद उसी की छाप उनके निर्णय पर है। इससे मुझे यह कहते हुए दुःख होता है। यदि इस विषय पर मैं चुप्पी साध लूंगा, तो मैं उनके हितों के प्रति वफादार नहीं होऊंगा जो मुझे जी जान से प्यारे हैं। मैं उनके अधिकारों को लेकर कोई सौदेबाजी नहीं करूंगा, चाहे उसके बदले मुझे सारे विश्व का साम्राज्य ही क्यों न मिल जाए? मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ बोल रहा हूं और कहता हूं कि डॉक्टर अम्बेडकर जो दावा पेश करते हैं, जैसे कि वह भारत के समस्त अस्पृश्यों की ओर से बोलते हैं, इससे हिंदू धर्म का विभाजन होगा, जिसे मैं किसी भी कीमत पर नहीं होने दूंगा। यदि अस्पृश्य इस्लाम अथवा ईसाइयत ग्रहण करना चाहें, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं। मैं उसे बर्दाश्त कर सकता हूं, लेकिन मैं यह नहीं बर्दाश्त करूंगा कि हिंदू धर्म गांव-गांव में दो भागों में विभाजित हो जाए। जो अस्पृश्यों के राजनैतिक अधिकारों के हितों की बात करतें हैं, वे भारत को नहीं जानते। वे नहीं जानते कि भारत का समाज किस प्रकार बना है। इसलिए मैं पूर्णतया स्पष्ट कर देना चाहता हूं, चाहे मैं अकेला भी रह जाऊं, मैं अंतिम सांस तक इसका विरोध करूंगा।य्

चेयरमैन ने, यह जानकर कि उसमें कोई सर्वमान्य समझौता नहीं हो पाया है, अल्पसंख्यक समिति के अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने के पहले, प्रतिनिधियों को परामर्श देते हुए कहा µ