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18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है, जो बहुमत और अल्पमत की होती है। हिंदुओं और अछूतों में ऐसा अंतरण नहीं होता जैसा सामान्य अल्पमत और बहुमत में होता है। अल्पमत और बहुमत में एक और लक्षण है। वह संबंध हिंदुओं और अछूतों के बीच है ही नहीं। अल्पमत और बहुमत का अंतर वैचारिक होता है, वह आधारभूत नहीं होता जैसा कि हिंदुओं और अछूतों के बीच आपसी कटूता में निहित है। अल्पमत और बहुमत संबंधों में तीसरा भेद भी होता है। वह भी हिंदुओं और अछूतों में विद्यमान नहीं है। कभी जो बहुमत जनता है, भावनाओं के कारण वह अल्पमत में बदल जाता है। यदि अल्पमत वाले संतुष्ट हो जाते हैं, तो वे बहुमत से टकराव नहीं करते। पर हिंदू बहुसंख्यकों और अछूतों अल्पसंख्यकों के बीच संबंधों के कारण परिवर्तनशील नहीं है। वे तो चिरंजन अलग-अलग समुदाय है। वे मात्र एक दूसरे से भिन्न ही नहीं है बल्कि उनमें परस्पर कटुता है। उनके विषय में इस तरह की बात करना वैसा ही होगा, जैसे कोई कहे कि जर्मन तो बहुसंख्यक है और फ्रांसीसी अल्पसंख्यक हैं।