22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उसे नहीं अपना सकेंगे। आर्थिक निर्भरता उनकी गरीबी और अपमानजनक स्थिति का परिणाम है। हिंदुओं की एक जीवन शैली है, जो उनके धर्म का एक अंग है। इस जीवन शैली में उनको बहुत से विशेषाधिकार प्राप्त हैं_ और अछूतों के सिर पर अपमानों का बोझ लदा हुआ है, जो मानवता के मूल्यों से मेल नहीं खाता। देश में फैले अछूतों का नवजीवन आंदोलन हिंदुओं द्वारा किए जाने वाले अपमान और अन्याय के विरूद्ध संघर्ष है, जो हिंदुओं ने धर्म के नाम पर उनके मत्थे मढ़ दिया है। हिंदुओं और अछूतों में भारत के हर गांव में भीतर ही भीतर संघर्ष चल रहा है। अभी यह प्रकट नहीं हुआ है। हिंदू समाचार पत्र इस बात को प्रचारित नहीं कर रहे हैं कि कहीं विश्व की नजरों में उनकी आजादी के प्रयत्नों की पोल न खुल जाए। लेकिन एक प्रशांत संघर्ष वास्तविकता है। ग्रामीण प्रणाली में सम्मानित जीवन संघर्ष में अछूत अपने आपको बेबस पाते हैं। यह संघर्ष आर्थिक और सामाजिक रूप से छोटे से वर्ग अछूतों के बीच है। हिंदू अक्सर अछूतों को कुचलने से कई कारणों से सफल हो जाते हैं। पुलिस और अदालते हिंदुओं के पक्ष में होते हैं। हिंदुओं और अछूतों के बीच विवाद में अछूतों को पुलिस से संरक्षण और अदालतों से न्याय नहीं मिलता। पुलिस और मजिस्ट्रेट हिंदू है और वे अपने कर्तव्य के बजाय अपने वर्ग की ओर झुक जाते हैं परन्तु हिंदुओं के हाथ में मुख्य हथियार आर्थिक शक्ति है जो गांवों में बसने वाले गरीब अछूतों के समानता संघर्ष को दबा सकते हैं जिसका उल्लेख 1928 में बम्बई द्वारा बनाई गई समिति की रिपोर्ट में किया गया है जो दलितों जातियों की शिकायतों के विषय में तैयार की गई थी। उसी से निम्नांकित सार-संक्षेप लिए गया है। इसमें इतनी सरलता से स्थिति पर प्रकाश डाला गया है कि हिंदुओं की सामाजिक व्यवस्था से अनभिज्ञ विदेशी भी समझ जाएं कि हिंदू अछूतों पर क्या क्या जुल्म कर सकते हैं। समिति ने कहा हैंः
‘‘हालांकि हमने दलित जातियों को नागरिक उपयोग के सभी अधिकार दिलाने
की सिफारिश की है फिर भी हमें डर है कि अभी बहुत दिनों तक उनके
पालन में कठिनाईयां होंगी। पहली कठिनाई तो यह है कि कट्टर हिंदू उनके
विरूद्ध खुलमखुल्ला उनके विरूद्ध हिंसा पर उतर आएंगे। यह उल्लेखनीय है
कि प्रत्येक गांव में दलित जातियों के लोग बहुत थोड़ी संख्या में हैं, इसके
विपरीत कट्टरपंथियों की संख्या बहुत अधिक है, जो दलित जातियों की ओर से
अपने हितों और महत्व पर आक्रमण की निर्मूल आशंका से किसी भी कीमत
पर संरक्षण को तैयार करते हैं। पुलिस कार्रवाई के भय से कट्टरपंथियों द्वारा