8. अलग बस्तियां - Page 41

24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं कि यह हिंदुओं पर ही आकर पड़ेगा। परन्तु इसका कोई कारण नहीं कि हिंदु इसे न उठाएं। हिंदुओं की मुट्ठी में ही तो सब कुछ है। देश भर में जमीन के मालिक वही है, व्यापार उनके हाथ में है और सरकार भी उन्हीं की है। राजस्व और लाभ के सभी साधन उनके नियंत्रण में हैं। अन्य समुदाय मुख्य रूप से अछूत, लकड़हारे और पनिहारे हैं। हिंदुओं की सामाजिक व्यवस्था ने हर बीज का एकाधिकार उन्हें सौंप रखा है। इसका कोई कारण नहीं है कि उनसे इस योजना की कीमत चुकाने के लिए न कहा जाए, जबकि वास्तव में सब कुछ उनके ही पास है।

जहां तक समय की बात है, यह तो छोटी सी बात है। यदि अछूतों के स्थानांतरण में बीस वर्ष भी लग जाएं - जो लोग हजारों वर्ष से हिंदुओं के गुलाम रहे हैं - वे 20 वर्ष में ही सही उस गुलामी से मुक्ति पर प्रसन्न होंगे।