10. हिंदुओं और उनके मित्रों से कुछ प्रश्न - Page 49

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं है। अंग्रेजों ने हिटलर के साथ युद्ध छेड़ा। श्री गांधी ने अंग्रेजों के विरूद्ध युद्ध की घोषणा की है। अंग्रेजों का एक साम्राज्य है। हिंदुओं का भी है, क्योंकि हिंदुत्व स्वामियों के आधिपत्य में हैं? यदि चर्चिल से युद्ध का उद्देश्य घोषित करने के लिए कहा जाता है। तो श्री गांधी और हिंदुओं से उनके संग्राम का उद्देश्य क्यों नहीं पूछा जा सकता? दोनों का कहना है कि उनका संग्राम स्वतंत्रता के लिए है। यदि यह बात है तो दोनों का यह कर्तव्य है कि वे संग्राम के उद्देश्यों को घोषित करें। ब्रिटेन से युद्ध जीत लेने के बाद श्री गांधी का उद्देश्य क्या होगा? क्या जिस स्वतंत्र्ता की उन्हें आशा है, उसके बाद वे अछूतों को भी स्वतंत्र कर देंगे या हिंदुओं को आज से भी अधिक अधिकार सौंप देंगं और अछूतों को बंधक बनाए रखेंगे? क्या श्री गांधी और हिंदू नई व्यवस्था कायम करेंगे या परंपरागत हिंदू भारत की पुनर्स्थापना से संतुष्ट हो जाएंगे, जिसमें जाति प्रथा और अस्पृश्यता मौजूद होगी और स्वतंत्रता, समानता तथा भ्रातृत्व को दरकिनार कर दिया जाएगा? मुझे सोचना चाहिए कि यह सवाल तथाकथित स्वाधीनता संग्राम में सहायता करने वाले अमरीकी दोस्तों को श्री गांधी और हिंदुओं से पूछना चाहिए। ये प्रश्न और स्पष्ट है। केवल इसी के उत्तर से अमरीकी मित्रों को यह पता चलेगा कि श्री गांधी का संग्राम स्वतंत्रता के लिए है या सत्ता के लिए। ये प्रश्न केवल स्पष्ट और वैध ही नहीं हैं, आवश्यक भी है। जो हिंदुओं को जानते हैं उनके लिए इनका औचित्य है। हिंदू अंर्तजात और कट्टर अनुदारवादी हैं और उनका स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के अनुरूप नहीं। निस्संदेह विश्व में सर्वत्र लोकतंत्र में असमानता मौजूद है पर अन्यत्र परिस्थितियों पर आधारित होती है, उसे धर्म से मान्यता नहीं मिलती। हिंदुओं की बात अलग है। हिंदू समाज में केवल असमानता ही नहीं, बल्कि असमानता हिंदू धर्म का प्राण है। हिंदुओं की समानता में रुचि नहीं है। उनकी अभिरुचि और प्रवृत्ति सभी व्यक्तियों के समान मूल्य के लोकतांत्रिक सिद्धांत के विरुद्ध है। प्रत्येक हिंदू धार्मिक दृष्टि से अनुदार और राजनीतिक दृष्टि से क्रांतिकारी है। श्री गांधी भी इस नियम का अपवाद नहीं है। दुनियां के सामने वे उदार बनते हैं, परंतु उनका उदारवाद एक मुखौटा है जो एकदम झीना-झीना है। आप कुरेदिए तो पता चलेगा कि कि उनके उदारवाद में अभिजात अनुदारवाद भरा है। वे जाति को कोसते हैं। वे कट्टर हिंदू हैं, जो हिंदू धर्म को मानते हैं। देखिए हिंदू 1976 की स्वाधीनता की प्रसिद्ध अमरीकी घोषणा को किस प्रकार लेते हैं। जब वह स्वाधीनता का यह अंश पढ़ते हैं तो खुशी से झूठ उठते हैं -

‘‘कि जब कोई सरकार इन उद्देश्यों का विध्वंश करने लगे तो जनता को यह

अधिकार है कि उसे बदल डाले और और नई सरकार बनाए, जिसकी आधारशिला

ऐसे सिद्धांतों पर रखी जाये और उसकी शक्तियां ऐसी निश्चित की जायें, जिनसे