परिशिष्ट 39
नहीं करती, जो कांग्रेस की प्रतिष्ठा तथा उसकी विचारधारा के विरूद्ध हो। विदेशियों की दृष्टि में केवल प्रेस ही भारत के राजनैतिक मामलों का सूचना का माध्यम है। प्रेस के कोलाहल के कारण इंग्लैंड और अमरीका के लोग मात्र एक बात समझ पाते हैं कि कांग्रेस ही भारत की प्रतिनिधि संस्था है, यहां तक कि अछूतों की भी।
इस प्रोपेगंडा के प्रभाव का कारण यह है कि अछूत इस का जवाब प्रोपेगंडा से नहीं दे सकते। वे कांगेसी दावों का जवाब देने के लिए प्रचार नहीं कर सकते। अछूतों की ओर से इसके कई स्पष्टीकरण हैं।
अछूतों का अपना कोई समाचार पत्र नहीं है और कांग्रेस का प्रेस उनके लिए बंद है। उसने अछूतों का रत्तीभर भी प्रचार करने की कसम खा रखी है। अछूत अपना प्रेस स्थापित नहीं कर सकते। कोई भी समाचार पत्र विज्ञापन राशि के नहीं चल सकता। विज्ञापन राशि केवल व्यावसायिक विज्ञापनों से आती है। भारत के छोटे बड़े व्यवसायी विज्ञापनों से आती है। भारत के छोटे व्यवसायी कांग्रेस से जुड़े हैं, जो गैर-कांग्रेसी संस्था का पक्ष नहीं ले सकते। भारत में असोसिएटेड प्रेस का स्टाफ, जो भारत की समाचार एजेंसी है, पूर्णतया मद्रासी ब्राह्मणों से भरा पड़ा है। वास्तव में भारत का संपूर्ण प्रेस उन्हीं की मुट्ठी में हैं और वह पूर्णतया कांग्रेस का पिट्ठू है। सुज्ञात कारणों से वह कांग्रेस का समर्थक है, और कांग्रेस के विरूद्ध समाचार को नहीं छाप सकता। यही साधन हैं जो अछूतों की पहुंच से बाहर हैं।
परन्तु यह सच है कि बहुत हद तक स्वयं अछूतों में प्रचार करने की प्रवृत्ति का न होना भी एक कारण है। प्रचार करने की प्रवृति का न होना उनकी देशभक्ति के कारण भी है कि कहीं ऐसा न हो कि कोई बात ऐसी हो जाए, जिससे बाहर देश की प्रतिष्ठा पर आंच आए। भारत की राजनीति के दो भिन्न-भिन्न पहलू हैं जिसका विदेशी राजनीति और संवैधानिक राजनीति के रूप के रूप में भेद किया जा सकता है। भारत की विदेशी राजनीति ब्रिटिश साम्राज्य से भारत को आजादी प्राप्त करने के संबंध में है, जबकि संवैधानिक राजनीति आजाद भारत के लिए भावी संविधान से संबंधित है। समीक्षकों के लिए दोनों वास्तव में एक दूसरे से भिन्न हैं। परंतु अछूतों को डर है कि यद्यपि भारतीय राजनीति के दो भिन्न पहलू हैं, जो विदेशी इस विषय में महत्व रखते हैं और जिन्हें सावधानी से समझाना है, वे इन्हें अलग-अलग दृष्टि से नहीं देख सकते और संवैधानिक नीतियों पर मतभेद रख सकते हैं। इसलिए अछूत कांग्रेसी प्रचार पर चुप्पी साधे हुए हैं। इससे उनके प्रचार का जवाब नहीं मिलता।
दरअसल कांग्रेस यह स्वीकार नहीं करती कि अछूत कांग्रेस द्वारा अपने विरूद्ध किए जा रहे प्रचार पर चुप इसलिए है कि इसके पीछे अछूतों की देशभक्ति की