परिशिष्ट 41
रूप से प्रभावित नहीं कर पाया है। परंतु इस पर मैं उनके साथ विवाद उत्पन्न करना नहीं चाहता। क्योंकि यह बात समझी जा सकती है कि उस अध्याय को पढ़ने के बाद कोई विदेशी कह सकता है कि मैंने यह कारण तो बताया है कि अछूत स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल क्यों नहीं हुए किंतु इसका कोई आधार नहीं बताया गया है कि हम उस संस्था का संस्था का समर्थन क्यों नहीं कर रहे जो स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रही है।
यदि कांग्रेस के समर्थन का आधार दूसरी स्थिति है, तो यह अलग बात है। तब यह आवश्यक हो जाता है कि उनकी प्रवृति की तार्किकता का निरूपण करें और उन्हें गलती न करे दें।
आमतौर से जो व्यक्ति अपने पत्ते नहीं खोलता और स्पष्ट तथा निश्चित रुख नहीं दिखाता ताकि उसकी ईमानदारी का परिचय मिल सके, जो लोगों का दिल नहीं जीतता और अपनी मंशा पर संदेह रखने वालों से सहयोग नहीं लेता उस पर कोई विश्वास नहीं करेगा। कांग्रेस पर भी यही नियम लागू होना चाहिए परंतु जैसा कि मैंने अध्याय 7 में कहा है, कांग्रेस ने उस लोकतंत्र का स्वरूप अभी स्पष्ट नहीं किया है, जिसे वह भारत में लागू करना चाहती है। यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि पराधीन वर्गों की विशेष रूप से उसमें अछूतों की क्या स्थिति होगी। दरअसल अछूतों और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों की अनवरत मांग के बावजूद उसने वह प्रारूप पेश नहीं किया है। ऐसी धारणा के अभाव में विदेशियों के बारे में यह विचित्र सा लगता है कि वे इस आधार पर कांगे्रस का समर्थन करें कि वह लोकतंत्र की हामी है।
यह समझने का कई आधार निश्चित रूप से नहीं है कि कांग्रेस भारत के लोकतंत्र की स्थापना का आयोजन कर रही है। ऐसा निष्कर्ष मात्र इसी बात से नहीं निकल सकता कि कांग्रेस स्वतंत्रता संघर्ष में जुटी है। इससे पूर्व कि वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचे उनका कर्तव्य है कि वे एक और अन्य प्रश्न पूछें कि कांग्रेस किसकी आजादी के लिए लड़ रही है? अपेक्षाकृत इस प्रश्न के कि क्या कांग्रेस किसी की आजादी के लिए लड़ रही है? यह एक प्रत्यक्ष और आवश्यक प्रश्न है ओर किसी भी स्वतंत्रता प्रेमी की यह गलती होगी कि वह सच्चाई जानने पर जोर दिए बिना कांगे्रस का समर्थन करे। परन्तु जो विदेशी कांग्रेस के पक्षधर हैं, वे ऐसे प्रश्न उठाने की परवाह नहीं करते। सोचने वाले को भी यह सोचना चाहिए कि वह यह प्रश्न स्वभाविक रूप से उठाए और उस पर जोर भी दे और यदि वह प्रश्न उठाएगा और उस पर जोर देगा तो मुझे विश्वास है कि उसे भरपूर सबूत मिलेंगे कि कांग्रेस लोकतंत्र के लिए कार्य नहीं कर रही है बल्कि प्राचीन हिंदू धर्म की पुनर्स्थापना के लिए काम कर कर रही है जिसमें वंशानुगत शासक वर्ग हो और वंशानुगत दास।