42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मेहनतकश जातियों विशेष रूप से अछूतों के हितचिंतन संबंधी विदेशी की प्रवृत्ति एक महत्वपूर्ण बात है और कोई भी पक्ष इसे विलक्षणता मान कर खारिज नहीं कर सकता। अछूतों का प्रतिनिधित्व करने वाले के लिए यह आवश्यक है कि वह इस पर विचार करे और कांग्रेस समर्थक विदेशियों को समझाने की पूरी कोशिश करे कि वह गलत दल का समर्थन कर रहा है।
III
पसंद और नापसंद के सवालों के साथ ही कांग्रेस के प्रति विदेशियों के विचित्र व्यवहारक के स्पष्टीकरण से यह मालूम पड़ता है कि स्वतंत्रता, स्वायत्त शासन और लोकतंत्र के बारे में कुछ नीतियां हो सकती है, जैसी कि पश्चिमी राजनीतिशास्त्रियों ने बताई हैं और एक औसत विदेशी के लिए वही ढर्रा बन गया है।
विदेशी देश की स्वतंत्रता और देश के लोगों की स्वतंत्रता में भेद नहीं करते। वे यही मान कर चलते हैं कि देश की स्वतंत्रता का अर्थ है देश के लोगों की स्वतंत्रता और यदि किसी देश को स्वतंत्रता मिल जाती है तो देश के लोगों को भी स्वतंत्रता मिल ही जाती है।
राजनैतिक क्षेत्र में पश्चिमी विचारकों द्वारा सिद्धांत प्रतिपादित किए गए हैं कि स्वायत्तशासी सरकार के लिए संवैधानिक नैतिकता आवश्यक है। ग्रोटऽ इसको प्रवृति मानते हैंः ‘‘किसी संवैधानिक स्वरूप का सर्वोच्च सम्मान इसी बात में है कि उसके अधीन कार्यरत कार्यपालकों से आज्ञापालन कराया जाए, यद्यपि उनको एक निश्चित वैधानिक संयम के अंतर्गत स्पष्ट बोलने और कार्य करने की प्रवृत्ति की छूट दी जा सकती है तथापि उनके सार्वजनिक कृत्यों के लिए जन भावनाओं पर संपूर्ण विश्वास के साथ उन पर कड़ी फटकार लगाई जाए और पार्टी कार्यों की कड़वाहट को स्वीकार किया जाए। तब ही संवैधानिक स्वरूप निर्दोष कहा जा सकता है। वह विरोधियों की दृष्टि में और भी अधिक पवित्र होगा।’’ यदि जनसाधारण में ऐसी आदते विद्यमान हैं, तब पाश्चात्य राजनैतिक विचारों के अनुसार स्वायत्त शासन एक वास्तविकता हो सकता है और उसके आगे और कुछ कहने की आवश्यकता नहीं। विचारकों का प्रजातंत्र के विषय में विश्वास है कि आदर्श प्रजातंत्र वयस्क मताधिकार की व्यवस्था है और दूसरे उपाय भी सुझाए गए हैं जैसे कि प्रतिनिधियों को वापस बुला लेने का अधिकार, जनमतसंगह, और संसद के अल्पकालिक अवधि में चुनाव, कुछ देशों में
ऽ ग्रोट हिस्ट्री आफ ग्रीस खंड-3 पृष्ठ 347