नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 62

परिशिष्ट 45

अधिकारों में समता की धारणा का विस्तार किया। यह माना जाता है कि जो संगठन समय के प्रतिकूल हैं वे सरकार को विवश नहीं कर सकते। इसलिए जो देश लोकतंत्र के पक्षधार हैं वहां भी संसदीय लोकतंत्र के विरूद्ध गहरा अंसतोष है। तानाशाही वाले देशों के मुकाबले वहां स्वाभाविक रूप से अंसतोष के कारण भिन्न है। इस समय विस्तार से नहीं लिखा जा सकता परंतु मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि संसदीय लोकतंत्र के विरूद्ध असंतोष का कारण यह असहसास हो जाना है कि यह जनसाधारण को स्वतंत्रता का अधिकार, संपत्ति और खुशहाली का अधिकार दिलाने में विफल रहा। इस विफलता का कारण या तो गलत विचारधारा हो सकता है या गलत संगठन अथवा दोनों ही।

 दोषमुक्त विचारधाराएं जो संसदीय लोकतंत्र की विफलता के लिए जिम्मेदार हैं, उनके विषय में मुझे संदेह नहीं कि उनमें से एक है समझोते या संविदा की आजादी। यह विचारधारा एक रूढि़ बन गई और इसे स्वतंत्रता के नाम पर जकड़कर रखा गया। संसदीय लोकतंत्र में आर्थिक विषमताओं पर ध्यान नहीं रखा गया। संसदीय लोकतंत्र में आर्थिक विषमताओं पर ध्यान नहीं दिया जाता और इसकी परवाह नहीं की जाती कि संविदा पक्षों के बीच संविदा स्वतंत्रता के परिणामों पर इसके बावजूद विचार नहीं किया जाता कि संविदा पक्ष मोलतौल करने की बराबर की स्थिति में नहीं होते। इस व्यवस्था में यह गलत नहीं माना जाता कि संविदा की स्वतंत्रता के नामर पर प्रबल पक्ष निर्बल को दबा बैठे। इसका परिणाम यह है कि संसदीय लोकतंत्र स्वतंत्रता की प्रचारक बन कर एक तरफ खड़ी हो जाती है और गरीबों दलितों और वंशानुगत दीन-हीन वर्ग पर आर्थिक ज्यादतियां होती हैं।

 संसदीय लोकतंत्र दूषित करने वाली दूसरी गलत विचारधारा हैं, जिसमें आभास नहीं होता कि जब तक आर्थिक सामाजिक लोकतंत्र नहीं होता, तब तक राजनीतिक लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता। कोई व्यक्ति इस सिद्धांत को चुनौती दे सकता है, जो इसे चुनौति देने पर आमादा हों मैं उनसे एक प्रति प्रश्न करूंगा। इटली, जर्मनी और रूप में संसदीय लोकतंत्र आसानी से क्यों विफल हो गया? इंगलैंड और अमरीका में वह यूं ही क्यों विफल न हो गया? मेरे हिसाब से इसका एक ही कारण है। वह यह है कि दोनों देशों में पूर्वोक्त देशों की अपेक्षा अधिक आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र है। सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र राजनीति लोकतंत्र का तानाबाना है। जितना ही मजबूत यह तानाबाना होगा उनकी दृढ़ता उसमें होगी। समानता लोकतंत्र का दूसरा नाम है। संसदीय लोकतंत्र में स्वतंत्रता की लालसा उत्पन्न होती है। इसका समानता से कोई रिश्ता ही नहीं होता। यह समानता का महत्व समझने में विफल रही और समानता और