परिशिष्ट 49
यह पलटी नहीं खाई है क्योंकि उन्होंने यह सोचा होगा कि हमने जो विश्वासघात किया उससे वे दुनिया में किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे। या यह उनका विनम्र भाव है। अब यह देखा जाए कि इनमें से सच क्या है? ब्राह्मण ही शासक जातियां हैं, इस पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया जा सकता । जरूरी हो तो दो प्रकार से इसकी परीक्षा की जा सकती है। प्रथम परीक्षा लोगों की इनके प्रति भावना की और दूसरी प्रशासन में इनकी भागीदारी की। जहां तक पहले परीक्षा की बात है अर्थात् लोगों की ब्राह्मण वर्ग के प्रति भावना का सवाल है उसमें कोई संदेह नहीं किया जा सकता। सर्वसाधारण की भावना के अनुसार चाहे वह ऊंचा हो या नीचा सबके लिए ब्राह्मण पवित्र है। वह अत्यधिक धर्मात्मा है, जिसके आगे सब नतमस्तक होते हैं। पूर्व ब्रिटिश काल में उसे दंड से मुक्ति मिली हुई थी, जो निम्न वर्ग को प्राप्त नहीं थी। प्राचीन काल में ब्राह्मण चाहे हत्या जितना जघन्य अपराध करे, उसे मृत्यु दंड नहीं दिया जा सकता था। उसे पवित्र मनुष्य मान कर ही सभी प्रकार की सुविधाएं प्राप्त थी।
एक समय ऐसा था जब शासित वर्ग का कोई मनुष्य उस पानी को पिए बिना भोजन नहीं कर सकता था, जिस पानी से ब्राह्मण के पैर का अंगूठा न धोया गया हो। सर पी.सी.रे ने अपने बचपन की बात लिखी है कि कलकत्ता की सड़कों पर प्रातः काल शासित जातियों के बच्चे पात्रो में पानी के लिए ब्राह्मण के पैर धोने के लिए घंटो प्रतीक्षा किया करते थे। वे पैर धोकर यह पानी अपने माता पिता को देते थे, जो भोजन के लिए उनकी प्रतिक्षा करते रहते थे। ब्राह्मण प्रथम फल प्राप्त करने का सही अधिकारी था। मालाबार में जहां संबंधम् विवाह प्रथा प्रचलित थी वहा शासित जातियां जैसे नायर अपनी कन्याओं को ब्राह्मण द्वारा रखैल बनाए जाने को अपनी इज्जत समझते थे। यहां तक कि राजा भी अपनी रानियों का शील भंग करने के लिए ब्राह्मण को निमंत्रण देते थे।ऽ
ब्रिटिश शासन के कारण और कानून के समक्ष समानता के कारण ब्राह्मणो के विशेषाधिकार और दंडित न किए जा सकने की सुविधाएं छिन गई। फिर भी निम्न वर्ग उसे पवित्र मानते हैं। आज भी वे उसे स्वामी कह कर पुकारते हैं, जिसका अर्थ है भगवान।
ऽ यात्री श्री लुडोविको डि वरथेमा जो 16वीं शताब्दी के मध्य में भारत आया था मालाबार के विषय में
लिखता है फ्यह जानकर अच्छा लगा कि ये ब्राह्मण कैसे हैं ? यह आपको ज्ञात होना चाहिए कि हमारे
पुजारियों की तरह ब्राह्मण भी धर्म के मुखिया हैं और जब कोई राजा अपनी पत्नी व्याह कर लाता
है तो वह पहले ब्राह्मणों में से एक सुयोग्य और प्रतिष्ठित ब्राह्मण को अपनी नव-विवाहिता पत्नी के
साथ पहली रात में सोने के लिए चुनता है, इसलिए कि ब्राह्मण उस विवाहिता रानी का शील हरण
करे। यह न समझे कि ब्राह्मण ऐसा करने के लिए इच्छापूर्वक जाते हैं। इसके लिए राजा उस ब्राह्मण
को 400-500 स्वर्ण मुद्राएं देता है। कालीकट में राजाओं के अतिरिक्त और किसी में भी ऐसी प्रथा
नहीं है। वायज आफ वरेथेमा (क्यियात सोसायटी खंड 1, पृष्ठ 141)