62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मध्य प्रांत विधानमंडल के लिए एक मोची(चुन्नू) को चुना। और एक नाई (अर्जुन लाल) को तथा पंजाब में एक भंगी बंसीलाल चौधरी को चुना। 1934 में कांग्रेस ने केंन्द्रीय विधानमंडल के लिए एक कुम्हार (भगत चंदी मल गोला) को चुना। अब मैं वर्ष 1943 में बम्बई की एक बस्ती अंधेरी के लिए नगरपालिका चुनाव का उल्लेख कर रहा हूं, जिसमें कांग्रेस ने अपमानित करने के तौर पर नगरपालिका के लिए एक नाई को चुना।
शासक जातियों की यह कैसी मनोवृत्ति है। शासक जातियों में शासित जातियों के प्रति कितना क्रोध है कि उन्होंने इनके साथ ऐसा घृणित व्यवहार किया और फिर भी उनकी आजादी के लिए लड़ने का दावा किया। शासित जातियों की कैसी त्रासदी है, जिसने अपने अपमान पर गर्व अनुभव किया और उसमें स्वेच्छा से शामिल हो गए। आयरलैंड में सिन्नाफेन पार्टी ने ब्रिटिश पार्लियामेंट का बहिष्कार किया। परंतु क्या उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए अपने ही देश के लोगों के बारें में ऐसा वीभत्स रूप अपनाया। 1930 में विधानमंडल के बहिष्कार करने का आंदोलन बड़ा दिलचप्स था। 1930 में प्रांतीय में विधानमंडलों के लिए हुए चुनावों में जो घटनाएं घटी वे 1930 में गांधी जी के नमक सत्याग्रह के दौरान घटीं। मैं आशा करता हूँ कि भावी (कांग्रेसी इतिहासकार डा. पटटाभिसीतारमैया इस विषय में विफल रहें) कांग्रेसी इतिहासकार यह बताएंगे कि कैसे श्री गांधी ने वायसराय लार्ड इर्विन को नोटिस देने का निश्चय किया, जिसमें उन्होने अपनी मांगों की एक सूची किसी निश्चित समय तक मान लेने के लिए वायसराय को पेश की थी और वायसराय द्वारा मांगों के न मानने पर श्री गांधी ने किस प्रकार नमक कानून को निशाना बनाया और कैसे उन्होंने दांडी को सत्याग्रह के लिए चुना, किस प्रकार उन्होंने आंदोलन का स्वयं नेतृत्व करने का फैसला किया_ किस तरह वे अहमदाबाद के आश्रम से गाजे बाजे के साथ निकले, कैसे अहमदाबाद की औरतों ने उनकी आरती उतारी, माथे पर विजय तिलक लगाया, कैसे श्री गांधी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि अकेले गुजरात से ही भारत को स्वराज्य दिलाएगा_ कैसे श्री गांधी ने घोषणा की कि बिना स्वराज्य प्राप्त किए वह अहमदाबाद वापस नहीं लौटेंगे। इन सबका उल्लेख करने में कांग्रेसी इतिहासकार असफल न होगा कि एक तरफ कांग्रेसी स्वराज्य की लड़ाई में व्यस्त थे, जिसके लिए वे कहते थे कि समस्त जनता के नाम से वे उस लड़ाई को जीतना चाहते थे और दूसरी ओर उन्हीं वर्षों में वे नीची जातियों पर भयानक अत्याचार कर रहे थे और खुले तौर पर उनका अपमान कर रहे थे।
VI
शासित जातियों के प्रति कांग्रेस हाई कमान की यह मनोवृत्ति इस सिद्धांत के