नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 80

परिशिष्ट 63

विपरीत रही है कि शासक जातियों का प्रांतो में प्रभुत्व मात्र एक संयोग है। कुछ और भी बातें हैं जो इस सिद्धांत के संयोग कहे जाने के विपरीत जाती हैं। वे तालिका संख्या 6 में दर्शायी गई हैं। ये कांग्रेस द्वारा चुनाव लड़ने के लिए छाटें गए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यताओं से संबंधित है। यह स्पष्ट है कि ब्राह्मणों के बारे में स्नातक और गैर-स्नातक के अनुपात का अंतर गैर-ब्राह्मण और अनुसूचित जातियों की अपेक्षा बहुत अधिक था। क्या वह एक संयोग ही था या एक नीतिगत मामला था। यह चयन इस प्रकार किया गया था कि इसके मापदण्ड को देखते हुए यह पक्का संदेह हो सकता है कि उम्मीदवारों के चयन में कांग्रेस का एक निश्चित सिद्धांत था कि ब्राह्मणों के मामले में उन उच्चतम योग्यता वाले ब्राह्मण का चयन किया जाए तथा अनुसूचित जातियों में उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाए जिनकी योग्यता निम्नतम है। स्नातक और गैर-स्नातक का अंतर उस वास्तविक अंतर को प्रकट नहीं करता, जो ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मण उम्मिदवारों की हैसियत और स्थिति से सम्बद्ध है। ब्राह्मण उम्मीदवार न केवल स्नातक थे, बल्कि अनुभवी और प्रतिष्ठित राजनीतिज्ञ भी थे। गैर-ब्राह्मण उम्मीदवार नए स्नातक थे, जो मात्र दूसरे दर्जे के राजनीतिज्ञ हो सकते थे।

कांग्रेस ने चुनाव के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त ब्राह्मण उम्मीदवारों को ही क्यों छांटा? कांग्रेस ने चुनाव के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त ब्राह्मणों और अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधि न्यूनतम शिक्षा प्राप्त क्यों थे? इसका एक उत्तर है। इसका उदद्ेश्य गैर ब्राह्मणों और शासित जातियों के प्रतिनिधित्व को कांग्रेस मंत्रिमंडल में शामिल होने से रोकना था। ऐसा नहीं हो सकता था कि बेहतर शिक्षित गैर-ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं थे। प्रतीत होता है कि कांग्रेस ने जानबूझकर शिक्षित व्यक्ति के मुकाबले में अशिक्षित गैर-ब्राह्मण को प्राथमिकता दी थी, वह क्यों? क्योंकि शासक जातियों के विचार से शिक्षित गैर-ब्राह्मण की अपेक्षा अशिक्षित गैर-ब्राह्मण को चुनने में दो लाभ थे । एक तो यह कि अशिक्षित गैर-ब्राह्मण शिक्षित गैर-ब्राह्मण की अपेक्षा कांग्रेस हाई कमान का अधिक वफादार और कृतज्ञ होगा और कांग्रेस में शिक्षित गैर-ब्राह्मणों से मिल कर शासक जातियों के बने कांग्रेस मंत्रिमंडल के प्रति विद्रोह न कर सकेगा। दूसरे यह कि यदि स्नातक से कम योग्यता प्राप्त साधारण शिक्षित गैर-ब्राह्मण चुने जाते हैं तो उसका उददेश्य था कि कहीं कांग्रेस में शासक जातियों को धता बता कर, वे गैर-ब्राह्मण मंत्रिमंडल न बना ले। तीसरे यह कि कांग्रेस में जितने अधिक अशिक्षित गैर-ब्राह्मण होंगे, उतने ही कम अवसर गैर-ब्राह्मणों के समक्ष और वैकल्पिक मंत्रिमंडल बनाने के होंगे। इन परिस्थितियों में क्या इस बात में संदेह रह जाता है कि कांग्रेस जो आजादी की लड़ाई लड़ रही है वह आजादी केवल शासक जातियों की होगी।