नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 84

परिशिष्ट 67

नहीं जानता। यह सच है कि अन्य देशों में शासक दल है जो लोगों में उठ-बैठ नहीं रखते, जो उनके बराबर के नहीं है। न ही वे नीचे से ऊपर उठ चुके लोगों के साथ बैठनें में एतराज करते है, जन्म से अपने से अलग वर्ग के साथ मिलने जुलने में रूचि नहीं रखते और शासित जातियों को अपना स्तर सुधारने से रोकने के लिए हर तरीका अपनाते हैं।

VIII

फ्रांसीसी क्रांति से पूर्व फ्रांस में शासक वर्ग था । जापान में 19वीं शताब्दी के आठवें दशक के पूर्व शासक जातियां थी, जब जापान ने अपने संविधान को आधुनिक रूप देने का फैसला किया। इन दोनों देशो में शासक वर्ग ने महसूस किया कि यह राष्ट्रय संकट की घड़ी है, इसलिए उन्होने अपने पुराने अधिकारों और विशेषाधिकारों को त्यागने का निर्णय किया ताकि कुलीन तंत्र से सहज रूप से लोकतंत्र में संक्रमण हो सके।

फ्रांस में जब क्रांति ने अंगडाई ली और जनता ने शासक जातियों से समानता की मांग की तो शासक जातियों ने स्वच्छा से सत्ता और अधिकार छोड़ कर अपने को जनता में शामिल कर लिया। जब स्टेट्स जनरल को बुलाया गया उस समय जो हुआ उससे यह स्पष्ट है। कामन्स के 600 प्रतिनिधि थे तथा पादरियों और सामंतो के प्रत्येक के तीन-तीन सौ थे। प्रश्न यह उठा कि 1200 सदस्य कैसे बैठेंगे, बहस करेंगे और मतदान करेंगे। कामन्स ने आग्रह किया कि सभी पक्ष एक चेम्बर में एकत्र हों और एक मत के आधार पर मतदान करें। पादरियों तथा सामंतो ने इस स्थिति को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि ऐसा करने का अर्थ होता अपनी अमूल्य परंपराओं, सुविधाओं का परित्याग करना। तब भी उनमे से अधिकांश ने कामन्स की मांग स्वीकार कर ली और फ्रांस को स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व पर आधारित संविधान दिया।

जापान के शासक वर्ग ने वर्ष 1855 से 1870 के दौरान सामंतशाही को त्याग कर वर्तमान शासन पद्धति अपनाई, वहां शासक वर्ग फ्रांस के शासक वर्ग की अपेक्षा अधिक देशभक्त था। जैसा कि जापान के इतिहास का विद्यार्थी जानता है, जापानी में चार वर्ग थेः (1) दमियो, (2) समुराई, (3) हेमिन अथवा जनसामान्य, तथा (4) ईटा अथवा बहिष्कृत। इन जातियों के सीढ़ी दर सीढ़ी ऊंचे नीचे वर्ग थे। सबसे नीचें ईटा थे, जो हजारों की संख्या में थे। उनसे ऊपर हेमिन थे, जो ढाई-तीन करोड़ थे। हेमिन से ऊपर समुराई थे, जिनकी संख्या 20 लाख थी, जिनके हाथों में हेमिनों का जीवन मरण बंद था। उससे ऊपर दमिया अथवा बड़ी जागीर वाले सांमत थे, जिनका नीचे के तीनों वर्गो पर पूर्ण शासन था। उनकी संख्या 300 थी। दमिया और समुराई