74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए सुरक्षित थे। सारे मंत्री तो ब्राह्मण होते ही थे। इसकी यहीं इतिश्री नहीं थी। ब्राह्मण अपने वर्ग के लिए लाभ और सत्ता के पद आरक्षित करके ही संतुष्ट नहीं थे। वे जानते थे कि केवल आरक्षण ही प्रर्याप्त नहीं है। गैर-ब्राह्मणस जातियों में ब्राह्मणों के समान योग्यता वाले लोगो द्वारा मुख्य पदों को प्राप्त किए जाने और ब्राह्मणों के आरक्षणों को उखाड़ फैंक देने वाले लोगों के आंदोलन की संभावनाओं को असंभव बनाना भी ब्राह्मणों ने आवश्यक समझा। ब्राह्मणों ने समस्त शासकीय पदों को अपने लिए आरक्षित करने के साथ-साथ शिक्षा पर भी एकाधिकार जमाए रखने के लिए विधान बनाया। जैसा कि पहले भी संकेत दिया जा चुका है, ब्राह्मणों ने विधान बना कर हिंदू समाज के निम्नतर वर्ग के लिए पढाई-लिखाई अपराध घोषित कर दी जिसका उल्लंघन करने पर केवल कठोर ही नहीं अमानुषिक दंड, जैसे अपराधी की जीभ कटवा लेना और उसके कान में पिघलता सीसा डलवा देने की भी व्यवस्था कर दी। यह सच है कि वे आरक्षण अंग्रेजी राज में लागू नहीं है परन्तु यह स्वीकार करना होगा कि वैसे तो मनु के विधान में नियत आरक्षण समाप्त हो गए है, परंतु कई शताब्दियों तक उसके जो लाभ उन्हें मिलते रहे है, उनसे वे अब तक फलफूल रहे हैं। जब मेहनकश जातियां इन आरक्षणों की मांग करती हैं, तो वह कोई नई बात या अजुबा नहीं है। आरक्षण की मांग उन शासक जातियों और संप्रदायवादियों की ज्यादतियों से सुरक्षा की मांग है जो मेहनकश जातियों पर हर क्षेत्र में प्रभुत्व जमाना चाहती हैं, इस मांग के साथ शासक जातियों पर कोई ऐसी घृणित शर्ते नहीं लगाई गई जैसी कि ब्राह्मणों ने अपनी अभिवृद्धि और अपने वर्चस्व की रक्षा के लिए शुद्रों पर लगाई थी, जैसे कि सत्ताहीन जातियों के लिए शिक्षा और संपत्ति प्राप्त करना अपराध था।
कार्यक्षमता के तर्क को जन-कल्याण की दृष्टि से भी देखना होगा। आयरलैंड की संसद के निचले सदन में कैंपबेल बेनरमेन ने कहा था कि अपनी सरकार किसी पराई सरकार से बेहतर होती है। भारत में यह बयान इतना लोकप्रिय हुआ कि यह एक नारे से भी आगे बढ़ गया। यह ब्रह्म वाक्य बन गया। देखनें में यह कथन बेहूदा है। कैंपबेल बैनरमैन अच्छी सरकार की स्वसरकार से तुलना नहीं कर रहे थे। वे सक्षम सरकार के और स्वसरकार के भेद को बता रहे थे। बल्कि दृढ संकल्प सरकार से तुलना कर रहे थे। उन्होनें अपने विपक्षी लार्ड सेलिसबरी के ही मुहावरे का इस्तेमाल किया। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि स्वसरकार अच्छी सरकार होनी चाहिए, वरना उसका ना होना भला। प्रश्न यह है कि अच्छी सरकार कैसी हो? कुछ लोगों की यह धारणा हो सकती है कि स्वसरकार प्रभुसत्तासपन्न सरकार हो सकती है और वह अच्छी सरकार होगी ही। यह एक सबसे बड़ी भ्रांति है, जो अधिकांश