76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हुए भी मुस्लिम जगत के धर्म इस्लाम को नहीं बदल सकता था। परंतु यदि सुल्तान ऐसा करता भी तो उसके लिए आंतरिक सीमाओं के साथ-साथ बाह्य सीमाएं भी सुदृढ़ थी। कभी-कभी लोग यह निरर्थक प्रश्न कर बैठते है कि पोप कोई सुधार लागू क्यों नहीं करता? इसका उत्तर यही है कि पोप क्रांतिकारी मनुष्य नहीं हो सकता और वह जो पोप हो जाता है, उसकी इच्छा क्रांतिकारी बनने की नहीं होती....।य्
मैं पहले ही कह चुका हुं कि मेहनतकश जातियां इसी से संतुष्ट नहीं हो सकती कि उनका देश स्वतंत्र हो गया है और उनकी प्रभुसत्ता है। उनके लिए आवश्यक है कि कुछ कदम और बढ़ाए जाए और यह देखा जाए कि देश का संचालन कौन करने जा रहा है। डायसी ने जो कुछ कहा उसकी सच्चाई से कोई इंकार नहीं कर सकता। शासक वर्ग क्या कर सकता है उसमें इतना और जोड़ लिया जाए कि अच्छी सरकार के लिए योग्यता और क्षमता की काफी नहीं है, आवश्यकता ऐसे शासक वर्ग की है, जिसमें कल्याण भावना या डायसी के शब्दों में आंतरिक मर्यादाओं से जो स्वार्थी वर्ग लगाते हैं मुक्ति, कार्यक्षमता सिद्धांत में वर्ग विशेष का स्वार्थ भी समाया होता है तो उससे अच्छी सरकार स्थापित होने की बजाए वह मेहनतकश वर्ग के दमन का साधान बन जाता है।
राज्य के माध्यमों का चयन करते समय, माध्यमों में वर्गभेद के विचारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अच्छी सरकार के लिए यह नितान्तावश्यक है। दुर्भाग्य से इसे महत्व नहीं दिया गया, यहां तक कि उनके द्वारा भी जो खुद को लोकतंत्र का हिमायती कहते हैं। सबसे पहले इसका महत्व कार्ल मार्क्स ने समझा और उन्होनें पेरिस कम्यून के प्रशासन में इसे परखा। यह कहने की आवश्यतका नहीं कि आज सोवियत रूस की सरकार की बुनियाद वही है। भारत में मेहनतकश वर्ग की आरक्षण की मांग उसी सोच पर आधारित है, जिसका संकेत डायसी ने दिया, मार्क्स ने जिसकी वकालत की और रूस ने जिसे अपनाया। मेहनकश जातियों के संरक्षण करने के बारे में केवल उस वर्ग से संबंधित लोगो पर ही भरोसा रखा जा सकता है। यह सोच इतनी महत्वपूर्ण है कि कार्यक्षमता का सिद्धांत उस पर हावी नहीं हो सकता । यदि भारत की शासक जातियां कार्यक्षमता का राग अलापती है, तो उसका कारण उनका यह इरादा काम करता है कि सरकार के तंत्र पर एकाधिकार जमा लिया जाए।
IX
पिछली बहस इतनी लंबी खिंच गई है कि विदेशी पाठक उन मुद्दों को समझ ही न पाया होगा जिनको स्पष्ट करने का हमारा इरादा था। इसलिए उनको समझने के लिए उन्हें एक कड़ी में पिरोना आवश्यक होगा।