नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 95

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वही चीज है, जिसे अमरीकी निगरानी और नियंत्रण कहते है, प्रत्येक संविधान में रहना आवश्यक है जिससे लोकतंत्र के शत्रु उस पर काबिज होकर न बैठ जाएं। भारत की मेहनकश जातियों द्वारा की जा रही मांग और अमरीका के निगरानी और नियंत्रण लागू करने में दो मापदंड हो सकते है। पहला यह है कि राजनैतिक संविधान और देश की सामाजिक संस्थाओं के बीच तालमेंल हो। तभी वास्तविक लोकतंत्र बच सकता है। यदि दो देशों के बीच सामाजिक प्रथाएं भिन्न हैं तो वहां निगरानी और नियंत्रण का मापदंड भी भिन्न रखना होगा। उदाहरण के लिए जो देश जात़पात की व्यवस्था से ग्रस्त हैं, वहां उन देशो से भिन्न निगरानी और नियंत्रण की आवश्यकता है जहां सामाजिक लोकतंत्र की भावना मौजूद है। दूसरी बात यह है कि मेहनकश जातियों को सुदृढ़ आधार प्रदान किया जाए, ताकि वे अधिकारसंपन्न शासक वर्ग के दमन से बची रहें। कुछ देशो में मेहनकश वर्गो के लिए वयस्क मताधिकार की काफी हैं, जिससे वे प्रशासन वर्ग से स्वयं सुरक्षित रह सकते हैं। भारत में अन्य देशों के विपरीत शासक जातियां सर्वशक्तिमान और इतनी सर्वव्यापी हैं कि वयस्क मताधिकार के साथ-साथ अन्य उपाय भी आवश्यक हैं, ताकि वे शासक जातियों के शोसन से बची रह सकें। इसके परिप्रक्ष्य में मेहनकश जातियों की आरक्षण की मांग मूलतः अमरीकी संविधान की निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था से भिन्न नहीं है। इसलिए किसी विदेशी को उनके विरूद्ध कोई धारणा बनाने से पूर्व इस पर विचार करना चाहिए।

यथार्थ में उपरोक्त संदर्भ में जो बातें कही गई हैं, उनका उद्देश्य कांग्रेस और शासक जातियों के संबंधो को दर्शाना है। उन पर पूरा प्रकाश डाल दिया गया है। इन तथ्यों को ध्यान में रखने पर विदेशी को स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस और शासक वर्ग कितना घनिष्ठ संबंध है। उन तथ्यों से स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में शासक वर्ग कांग्रेस की टोली में क्यों घुस गया है, और कांग्रेस को सभी लोगो के समर्थन का क्यों प्रचार करता है। संक्षेप में, शासक वर्ग को भली-भांती मालूम है कि सुविधाहीन लोगों का आंदलोन वर्ग-सिद्धांत, वर्गीय हितों और जातीय संघर्ष पर आधारित है। यह एक दिन सुविधासंपन्न वर्ग की कब्र खोद देगा। वे जानते हैं कि सेवक वर्गो की मांग को पटरी से उतारने के लिए राष्ट्रीयता और एकजुटता को खतरे का हौवा खड़ा कर उन्हें बुद्धू बना दिया जाए। वे यह भी समझते है कि कांग्रेस ही ऐसा मंच है, जिसमें शासक वर्ग का हित सुरक्षित है, क्योंकि यदि कोई दल ऐसा है जिसके मंच से अमीर, गरीब, ब्राह्मण, गैर-ब्राह्मण, जमींदार और आसामी, महाजन और कर्जदार के बीच के विवाद पर तुषाराघात करके संघर्ष की ओर से ध्यान बंटाया जा सकता है, तो वह एकमात्र कांग्रेस है। कांग्रेस ही वह मंच है, जहां से देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का झंडा फहरा कर उनका हितसाधन किया जा सकता है।