नवम् अध्याय विदेशियों के लिए दलील दास्ता का दर्द बर्दास्त नहीं - Page 97

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शासक जातियों को उनकी औकात बता दें। यदि संविधान में संरक्षण नहीं रखे गए तो शासक जातियों का मेहनतकश जातियों पर प्रभुत्त जारी रहेगा। इस बिंदु को देखते हुए विदेशियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कांग्रेस का बहु प्रचारित प्रतिनिधित्व स्वरूप विशुद्ध अप्रासंगिक है। कांग्रेस एक प्रतिनिधि संस्था हो सकती है और स्वतंत्रता संग्राम कहे जाने वाले कार्य में लगी हो सकती हैं परंतु इन बातों का अर्थ यह नहीं कि व इस मुद्दे पर फैसला कर लें । यदि कोई लोकतंत्र प्रेमी कांग्रेस का मित्र बनने से पूर्व यह मांग करे कि संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की जाए और इस बात से संतुष्ट हो जाए कि संविधान में ऐसी स्पष्ट और सकारात्मक व्यवस्था को कि मेहनकश जातियों की सुरक्षा, संरक्षण, स्वतंत्रता और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त हो।

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जो विदेशी भारत के मामले में रूचि लेते हैं, उन्हें दो वर्गो में विभाजित किया जा सकता हैं। पहला वर्ग उन लोगों का है, जो यात्री हैं या पर्यटक हैं, जो बहुत कम समय के लिए भारत आते हैं, जिन्हें भारतीय परिवेश और यहां की राजनीति और समस्याओं का कोई ज्ञान नहीं होता या वे यह जानते है कि भारत की राजनितिक समस्याएं कितनी जटिल है और इन समस्याओं को सुलझाने में विभिन्न राजनैतिक दलों की क्या भूमिका है? दूसरे वर्ग में वे लोग आते है, जो लोकतांत्रिक जनमत के नेता है, जैसे अमरीका के लुई फिशर, किंग्सले मार्टिन, ब्रेल्सफोर्ड और लास्की जिनके ज्ञान को चुनौती नहीं दी जा सकती। मुझे उस समय कोई अफसोस न होता, यदि पूर्वोक्त विचार-विर्मश उन विदेशी पर्यटकों अथवा यात्रियों की सोच को ठीक करने के लिए होता जा बिना सोचे-समझे कांग्रेस के पक्ष में हो गये हैं, परंतु दुर्भाग्य से वैसा ही पक्षपात उन विदेशियों में भी मिलता है जो दूसरी श्रेणी में आते हैं।

कुछ ऐसे भी विदेशी हैं, जो भारत भ्रमण के लिए आते हैं। भारतीय राजनीति की बारीकियों को नहीं समझ सकते। यह समझ में नहीं आता ये विदेशी जो केवल उस आधार पर कांग्रेस का समर्थन केवल उसी रास्ते पर चल कर क्यों करते है, जैसा कि मि. पिकविक ने सैमवेलरा से कहा था कि ज्यादा से ज्यादा भीड़ इकट्ठी करके गला फाड़ो, परंतु सबसे बड़ी कष्टदायक बात यह है कि ब्रिटिश लेबर पार्टी के नेताओं का रवैया जो यूरोप और अमरीका के क्रांतिकारी एवं वामपंथी वर्ग के झंडाबरदार हैं जिनका प्रतिनिधित्व लास्की, किंग्सले, मार्टिन और ब्रेल्सफोर्ड जैसे लोग करते हैं, जैसे अमरीका के फ्नेशनय् और इग्लैंड के फ्न्यू स्टेट्समेनय् के संपादक करते हैं, जो दलित और पिछड़े लोगों के हिमायती माने जाते हैं। ये लोग कैसे कांग्रेस का समर्थन करते है? क्या वे नहीं जानते कि भारत में कांग्रेस और शासक वर्ग एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं? क्या वे नहीं जानते कि भारत में शासक जातियां ब्राह्मण-बनिया धुरी