15. खदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक - Page 101

76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अतः ‘काम से’ शब्दों की प्रस्तुति ने इस संदेश को जन्म दिया है। मैंने विभिन्न राज्यों द्वारा पारित प्रसूति लाभ विधेयकों के साथ धारा 5 का तुलनात्मक अध्ययन किया है और मैंने पाया कि ये शब्द ‘काम से’ उनमें विद्यमान नहीं हैं। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि इन शब्दों ‘काम से’ को, संदेह समाप्त करने के लिए, निकाल दिया जाए। मैंने धारा 5 की तुलना पांच विभिन्न प्रांतों के प्रसूति लाभ अधिनियमों से की और पाया कि शब्द ‘काम से’ उनमें नहीं है। यह संशोधन, दो अलग-अलग संशोधनों के माध्यम से किया जा रहा है। एक तो धारा 5 से इन शब्दों को निकाल कर जो अस्पष्टता पैदा करते हैं। अब महिला कर्मचारी प्रसव से पहले चार हफतों में प्रतिदिन प्रसूति लाभ पाने की अधिकारी होगी। उन दिनों के संबध में जब वह स्वेच्छा से आराम करना चाहती है और, जैसा कि मैं पहले ही सदन को बता चुका हूं, प्रसव से पहले के चार हफते स्वेच्छा से आराम करने के लिए हैं, यह उसकी इच्छा पर है कि वह काम पर जाए और अपनी पूरी दिहाड़ी कमाए या फिर घर पर रहे और अपने प्रसूति लाभ पर ही संतोष करे। इस संबंध में हमने परंतुक जोड़ा है कि इन दिनों ‘‘वह किसी प्रसूति लाभ की कतई अधिकारी नहीं होगी।’’ इन शब्दों के साथ मैं प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न यह हैः

‘कि खदान प्रसूति लाभ अधिनियम, 1941 में संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

खंड 2 विधेयक में जोड़ दिया गया।

खंड 3 विधेयक में जोड़ दिया गया।

शीर्षक और प्रस्तावना विधेयक में जोड़ दिए गए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव करता हूं कि विधेयक पारित किया जाए।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः

‘कि विधेयक पारित किया जाए।’