16. युद्ध-आहत (मुआवजा बीमा) विधेयक - Page 103

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस विधेयक पर ऐजेंडा में अनेक संशोधन हैं। कुछ संशोधन प्रक्रिया से संबंधित हैं और उनमें से अधिकतर सरकार द्वारा इसलिए प्रस्तावित किए गए हैं कि प्रवर समिति से आय इस विधेयक पर जो आलोचना की गई थी उसका निराकरण हो जाए। मुझे आशा है कि इन संशोधनों पर अधिक विवाद नहीं उठेगा।

महोदय, मैं नहीं समझता कि मुझे इस विधेयक के संबंध में और कुछ कहना है। मैं इसे प्रस्तुत करता हूं!

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः

‘‘कि युद्ध के आहत होने वाले कामगारों को मुआवजा देने का दायित्व नियोजकों

पर अधिरोपित करने और ऐसे दायित्व के लिए नियोजकों द्वारा बीमा कराने

का उपबंध करने वाले विधेयक पर, प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में

विचार किया जाए।’’

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ऽमाननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं नहीं समझता कि इस चर्चा में भाग लेने वाले सदस्यों के भाषणों से ऐसी कोई बात पैदा हुई है, जिसका विस्तृत उत्तर देने की आवश्यकता है। उठाए गए कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिनकी प्रांसगिकता सदन में प्रथम वाचन के लिए विधेयक पेश किए जाने के समय हो सकती थी। मुझे याद है कि वे मुद्दे उठाए भी गए थे और मुझे यह भी याद है कि मैंने उसी समय अपनी बुद्धि के अनुसार उत्तर देने का प्रयास किया था। अतः मैं नहीं चाहता कि उन्हीं मुद्दों पर दुबारा चर्चा करके समय नष्ट किया जाए।

विधेयक में कुछ खास खंडों और संशोधनों के संबंध में जो मुद्दे उठाए गए हैं, वहीं कार्यसूची में हैं। समय की बचत की दृष्टि से मैं सोचता हूं कि इस अवसर पर मैं अपने भाषण पर व्यर्थ समय नष्ट न करूं। यह तब अधिक प्रासंगिक, उचित और संगत होगा जब संशोधन प्रस्तुत किए जाएंगे।

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अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः संशोधन प्रस्तुत हुआः

‘‘कि विधेयक की धारा 6 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएः-

ऽ‘‘6. यह अधिनियम उन सभी कर्मचायिं पर लागू होगा, जिन पर कि कर्मचारी

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 3, 13 अगस्त, 1943, पृष्ठ 708