80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है। इसमें कर्मचारियों की श्रेणियों से अनियमित कर्मचारियों को निकाल दिया गया है और ऐसे कितने अनियमित कर्मचारी उन विशेष उद्योगों में काम कर रहे हैं जिन पर यह विधेयक लागू होता है, कोई नहीं जानता। मेरे माननीय मित्र श्री जोशी को यह भी याद होगा कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम ने उन लोगों को भी अलग रखा है जो क्लर्क की हैसियत में काम कर रहे हैं। मेरा विचार है कि श्री जोशी यह मानेंगे कि कर्मचारियों की कोई छोटी श्रेणी भले ही छूट गई हो पर कर्मचारी शब्द की परिभाषा, कर्मचारी मुआवजा अधिनियम में दी गई परिभाषा से बहुत बड़ी है। मैं आशा करता हूं कि मेरे माननीय मित्र इस आश्वासन पर अपना संशोधन वापस ले लेंगे।
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ऽअध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न यह हैः
‘‘कि विधेयक की धारा 6 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया
जाएः-
- यह अधिनियम उन सभी कर्मचारियों पर लागू होगा, जिन पर कर्मचारी
मुआवजा अधिनियम, 1923 लागू होता है।’’
प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मेरा अगला संशोधन सं. 5 है जो धारा 3 पर निर्भर करता है, जिससे सदन सहमत है कि इसे रहना चाहिए।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः क्या यह किसी अन्य संशोधन का विकल्प है? क्या मैं यह समझूं कि यदि इस संशोधन को स्वीकार कर लिया गया तो खंड 3 का संशोधन सं. 3 अनावश्यक होगा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः नहीं महोदय। यह आवश्यक है। दोनों आवश्यक हैं।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः उस स्थिति में, मैं यह नहीं समझा कि आप इस संशोधन को अभी पेश क्यों नहीं कर सकते?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं इस संशोधन सं. 5 को अब पेश करूंगा। महोदय मैं प्रस्ताव करता हूंः
‘‘कि विधेयक के खंड 6 के उपखंड 2 का लोप कर दिया जाए।’’
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 3, 13 अगस्त, 1943, पृष्ठ 711