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ऽपूर्ण श्रम सम्मेलन का प्रथम सत्र
सामाजिक सुरक्षा के बारे में डॉ. अम्बेडकर के विचार
दिल्ली में सोमवार, 6 सितम्बर को आयोजित पूर्ण श्रम सम्मेलन के प्रथम सत्र में श्रम सदस्य माननीय डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर द्वारा दिए गए भाषण का पूर्ण मूल-पाठ इस प्रकार हैः-
मैं ‘पूर्ण श्रम सम्मेलन’ के प्रथम सत्र में आप सभी का स्वागत करता हूं। तेरह महीने पूर्व गत वर्ष 7 अगस्त को प्रांतीय सरकारों, भारतीय रिसायतों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को भारत सरकार द्वारा त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली में आमंत्रित किया गया था।
इस सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य दोहरा था। काफी समय से यह दृढ़ विश्वास जड़ जमाए हुए था कि औद्योगिक समस्याओं तथा श्रम कल्याण से संबंधित समस्याओं का तब तक निराकरण नहीं हो सकता जब तक तीन पक्ष- सरकार, नियोक्ता और कर्मचारी एक दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व की भावना न रखें, एक दूसरे के प्रति अधिक आदर न दिखाएं तथा आदान-प्रदान की भावना से प्रेरित होकर मिलजुल कर काम करने के लिए सहमत न हों। काफी समय से परस्पर आदर और उत्तरदायित्व का विचार पनप नहीं रहा था क्योंकि एक पक्ष दूसरे पक्ष की आलोचना करने में लगा हुआ था। एक दूसरे को परस्पर समीप लाने तथा एक ही मेज पर आमने-सामने विचार-विमर्श करने के उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक योजना की आवश्यकता महसूस की गई।
यद्यपि इस प्रकार के त्रिपक्षीय संगठन का विचार पहले ही से बन रह था, तथापि इसमें संदेह है कि इससे शीघ्र ही कोई ठोस आधार तैयार हो जाता_ परंतु युद्ध ने श्रमिकों के मनोबल को बनाए रखने के लिए एक तात्कालिक आवश्यकता उत्पन्न कर दी। युद्ध ने एक अन्य प्रकार से भी त्रिपक्षीय संगठन के कार्यान्वयन में गति उत्पन्न कर दी।
ऽ इंडियन इन्फॉर्मेशन, 15 सितम्बर, 1943, पृष्ठ 143-44