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ऽभारतीय मजदूर संघ (संशोधन) विधेयक
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः
‘‘कि भारतीय मजदूर संघ अधिनियम, 1926 में आगे संशोधन करने वाले विधेयक को उस पर राय जानने हेतु परिचालित किया जाए।’’
इस विधेयक के बारे में राय जानने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव केवल परिचालन के लिए है इसलिए मुझे यह अनावश्यक लगता है कि मैं सदन का समय लूं और इस विधेयक के उन उपबंधों पर ब्यौरवार चर्चा करूं जो इस विधेयक में निहित हैं। मेरे विचार से सदन से यह कहना पर्याप्त है कि विधेयक की मुख्य बातें क्या हैं और ऐसा क्या उद्देश्य है जिसकी प्राप्ति के लिए सरकार को यह विशिष्ट विधेयक लाना पड़ा।
इस विधेयक की तीन प्रमुख बातें हैं। इसमें नियोक्ता पर यह जोर दिया गया है कि वह मजदूर संघ को मान्यता प्रदान करे। दूसरी बात यह है कि इस विधेयक में मजदूर संघ पर भी कतिपय शर्तें आरोपित की गई है। इन शर्तों के अनुसार मजदूर संघ को नियोक्ता द्वारा मान्यता दिए जाने के योग्य होना चाहिए। तीसरी बात यह है कि यदि किसी मजदूर संघ ने इस विधेयक में निर्धारित मान्यता-प्राप्ति की सभी शर्तों का पालन किया है और जिस कारण वह मान्यता योग्य है, ऐसी दशा में यदि कोई नियोक्ता उसे मान्यता देने से इन्कार करता है, तो इस विधेयक के उपबंधों के अनुसार, नियोक्ता को ऐसा करना एक अपराध होगा जिसके लिए वह कानूनन दंड का भागी होगा।
जैसाकि मैं कह चुका हूं, इस विधेयक के उपबंधों पर इस समय चर्चा करना अनावश्यक है। यह प्रस्ताव केवल परिचालित करने के लिए है जिसका स्पष्टतया अर्थ यह है कि सरकार द्वारा बनाए गए विधेयक में इस समय जो उपबंध हैं वे केवल अस्थायी हैं। इनके बारे में कोई अंतिम स्थिति अभी नहीं है और सरकार का ऐसा
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय) खंड 4, (1943) 13 नवम्बर, 1943, पृष्ठ 252-54