भारतीय मजदूर संघ (संशोधन) विधेयक
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कोई प्रस्ताव नहीं है कि इन उपबंधों को अंतिम माना जाए। जब सरकार को श्रमिकों के नेताओं, नियोक्ताओं, प्रांतीय सरकारों और उन अन्य पार्टियों के मत प्राप्त होंगे जिनका कि इन विधेयक से संबंध है तब इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। उस समय लाया जाने वाला विधेयक उस प्रारूप से नितांत भिन्न हो सकता है जो इस समय हमारे सम्मुख है। सरकार उन विभिन्न सुझावों पर ध्यान देगी जो इसके परिचालन के फलस्वरूप आएंगे।
श्री एन. एम. जोशी (मनोनीत गैर-सरकारी)ः मैं समझता हूं कि यह बेहतर होगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं समझता हूं कि प्रत्येक सदस्य का यही दृष्टिकोण होगा। इसलिए मैं इस प्रस्ताव द्वारा सदन को बताना चाहता हूं कि भारत सरकार किस उत्तरदायित्व को वहन करने के लिए यह विधेयक लाई है।
सदन को याद होगा कि इस मामले पर विचार किया जा चुका है और इस प्रश्न पर काफी ध्यान दिया गया था कि मजदूर संघों को नियोक्ताओं द्वारा मान्यता दी जाए और वे सभी माननीय सदस्य जिन्होंने श्रमिकों के संबंध में रॉयल कमीशन की रिपोर्ट का अध्ययन किया हैं याद करेंगे कि रॉयल कमीशन ने मजदूर संघों के स्वस्थ विकास के लिए और नियोक्ताओं व मजदूरों के मध्य मधुर संबंध स्थापित करने के प्रयोजन से मजदूर संघों को मान्यता देने पर बड़ा जोर दिया है। सदन को यह भी याद होगा कि रॉयल कमीशन ने उस समय यह कहा था कि सर्वोत्तम तो यह होगा कि यह मान्यता नियोक्ताओं पर विधि का दबाव न डालकर उनकी स्वेच्छा से प्राप्त की जाए। सदन को यह भी याद होगा कि रॉयल कमीशन ने 1929 में रिपोर्ट दी थी और अब 12 वर्ष बीत जाने पर भी नियोक्ताओं की ओर से ऐसी कोई इच्छा प्रकट नहीं की गई है कि वे स्वेच्छा से मजदूर संघों को मान्यता प्रदान करेंगे। वास्तव में नियोक्ताओं ने मजदूर संघों की मान्यताओं के विरोध में रॉयल कमीशन के समक्ष जो भी आपत्तियां प्रस्तुत की थीं वे आपत्तियां आज भी मौजूद हैं और नियोक्ताओं का यह दबाव है कि मजदूर संघों को मान्यता न दी जाए। इसके फलस्वरूप, स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
माननीय सदस्यों को याद होगा कि इस प्रश्न पर 1937 के बाद, जब प्रांतीय स्वायत्तता अस्तित्व में आई उन अधिकांश प्रांतीय सरकारों ने विचार किया था जो अस्तित्व में आई थी और जिन्होंने नवीन अधिनियम के अंतर्गत कार्यभार संभाला था। गैर-सरकारी सदस्यों तथा सरकारी मंत्रालयों द्वारा विधेयक पेश किए गए ताकि नियोक्ता मजदूर संघों को मान्यता प्रदान करें। उदाहरणार्थ, मद्रास में एक गैर-सरकारी विधेयक प्रस्तुत किया गया और तत्कालीन मंत्रालय ने भी एक सरकारी कानून इस संबंध में बनाया। बंबई में, बंबई मजदूर विवाद अधिनियम आया। मध्य प्रांत मेंं एक