104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अधिनियम के बारे में सोचा गया और एक प्रारूप तैयार किया गया और इसी प्रकार का कार्य संयुक्त प्रांत में भी किया गया। दुर्भाग्यवश, बंबई को छोड़कर अन्य प्रांतों के मंत्रालयों ने अपनी योजनाओं को विधिसम्मत रूप देने से पूर्व त्यागपत्र दे दिए। फिर भी भारत सरकार ने प्रांतीय स्वायत्तता के अस्तित्व में आने के बाद केंंद्र और प्रांतों में सहयोग की पद्धति का सुभारंभ किया और इस सहयोग के लिए अपनाया गया एक मार्ग श्रम मंत्रियों के सम्मेलन आयोजित करना। श्रम मंत्रियों का पहला सम्मेलन 1940 में इस विषय पर प्रांतीय सरकारों तथा केंद्रीय सरकार के बीच विचार-विमर्श करने के बाद आयोजित किया गया। उस समय यह निर्णय किया गया कि पर्याप्त सामग्री के अभाव में इस मामले में सम्मेलन द्वारा कोई निश्चित निष्कर्ष निकाला जाना संभव नहीं है और इसलिए सम्मेलन ने केंद्रीय सरकार को यह निदेश दिए कि इस मामले को प्रांतीय सरकारों को भेजना चाहिए ताकि प्रांतीय सरकारों तथा श्रमिकों के नेताओं और नियोक्ताओं के मत मिल सकें और यह सभी सामग्री श्रम मंत्रियों के द्वितीय सम्मेलन में प्रस्तुत की जाए जिसका आयोजन वर्ष 1941 में हो। तदनुसार, भारत सरकार ने प्रांतीय सरकारों को एक पत्र भेजा जिसका प्रयोजन उन विभिन्न पक्षों के मतों का संग्रह करना था जिनका इस कानून से संबंध था। विभिन्न प्रांतीय सरकारों द्वारा पर्याप्त मत एकत्र किए गए और उन्हें विभिन्न प्रांतों ने केंद्रीय सरकार को भेज दिया। 1941 में श्रम मंत्रियों के सम्मेलन का आयोजन किया गया और इस सम्मेलन में यह पूरी सामग्री प्रस्तुत की गई। उस समय यह निष्कर्ष निकाला गया कि केंद्रीय सरकार कानून बनाने का काम अपने हाथ में ले और वह कानून विशुद्ध प्रांतीय नहीं होना चाहिए तथा उसका प्रारूप उन उत्तरों के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए तो प्रांतीय सरकारों तथा उन विभिन्न पक्षों से प्राप्त हुए थे। इसके फलस्वरूप, भारत सरकार ने यह काम अपने हाथ में ले लिया और प्रस्तुत विधेयक वस्तुतः उन मतों पर विचार करके तैयार किया गया है। यही इस विधेयक का मूल है। इससे यह स्पष्ट होगा कि श्रम कानून प्रांतीय विषय होते हुए भी केंंद्रीय सरकार इस विधेयक को क्यों लाई है।
मैं नहीं समझता कि मेरे लिए यह आवश्यक है कि मैं इसके बारे में अधिक कुछ कहूं। जैसा कि मैं ने पहले कहा, ये प्रस्ताव अस्थायी है, अपने अंतिम रूप में नहीं है, और तब तक कोई अंतिम रूप नहीं हो सकता जब तक कि मौजूदा विधेयक के प्रारूप के बारे में लोक मत प्राप्त न हो जाएं। मैं केवल यही कह सकता हूं कि यह उन सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है जिन पर इस विधानमंडल से विचार करने का आग्रह किया गया है। यह एक अत्यंत महत्व का कानून है। अमरीका और स्वीडन के देशों को छोड़कर, अन्य देशों में मजदूर संघों की मान्यता स्वैच्छिक प्रयत्न