19. भारतीय मजदूर संघ (संशोधन) विधेयक - Page 130

भारतीय मजदूर संघ (संशोधन) विधेयक

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पर अवलंबित है। मुझे आशा है कि यह कानून विवादास्पद नहीं होगा। मैं इससे अधिक कहने का इच्छुक नहीं हूं। मैं यह अच्छी तरह समझता हूं कि मैं विधेयक में प्रस्तावित उपबंधों के लिए तब उत्तरदायी बनूं जब इसकी सार्वजनिक जांच-पड़ताल हो चुके। श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः

सभापति महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः

‘‘कि भारतीय मजदूर संघ अधिनियम, 1926 में आगे संशोधन करने

वाले विधेयक को उस पर राय जानने हेतु परिचालित किया जाए।’’

ऽश्री पी. के. ग्रिफिथ्स (असमः यूरोपीय)ः सभापति महोदय, सदन के समक्ष प्रस्ताव है कि विधेयक को परिचालति किया जाए .........मैं अपने माननीय मित्र को यह भी याद दिलाना चाहूंगा कि मजदूर संघों के अनेक दुश्मन हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः उनमें से एक नियोक्ता है।

* * *

@ माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैंने जो विधेयक प्रस्तुत किया है, उसके बारे में वाद-विवाद उठ खड़ा है यद्यपि ऐसी आशा नहीं थी। मैंने अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों में कहा था कि यह विधेयक असंदिग्ध रूप से विवादास्पद कानून है, परंतु मैंने यह भी कहा था कि मैं इस समय किसी भी वाद-विवाद में उलझना नहीं चाहता तथा उन विभिन्न मुद्दों पर कुछ नहीं कहना चाहता जो उठाए गए हैं। मैं उन माननीय सदस्यों के प्रति कोई प्रतिकूल भावना या अशिष्टता दिखाकर कुछ नहीं कहना चाहता जिन्होंने इस वाद-विवाद में भाग लिया है तथा अपने मत अभिव्यक्त किए हैं। मैं उन्हें यह आश्वासन देना चाहता हूं कि उनकी बताई गई बातों को मैं अपने ध्यान में रखूंगा तथा उनकी वैधता के बारे में उपयुक्त अवसर आने पर विचार करूंगा।

यदि मैं इस समय उत्तर देने के लिए खड़ा हो जाऊं तो, जैसा कि मैंने पहले ही कहा है, यह अवसर उन सब विभिन्न मुद्दों के उत्तर देने का नहीं है जो उठाए गए हैं। परंतु मैं यह महसूस करता हूं कि मुझे उन कुछ आलोचनागत मुद्दों का उत्तर देना है जो हमारे माननीय मित्र श्री ग्रिफिथ्स ने उठाए हैं। उन्होंने एक मुद्दा ऐसा उठाया है जिसके बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि यह बहुत अनुचित है। उन्होंने कहा कि मैंने एक ऐसा कानून प्रस्तुत किया है जिसमें किसी न किसी प्रकार की अस्पष्टता है और जैसा कि कहा गया है, यह खोखला है। उनकी आलोचना यह थी कि इस प्रकार का अस्पष्ट और खोखला कानून प्रस्तुत करना मेरे लिए एक अनुचित कार्य

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय) खंड 4, 13 नवम्बर, 1943, पृष्ठ 256

@ वही, पृष्ठ 276