भारतीय मजदूर संघ (संशोधन) विधेयक
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उपबंध हैः ‘‘ऐसी अगली शर्तें जो निर्धारित की जाएं।’’ मैं बिल्कुल नहीं समझा पर रहा हूं कि ग्रिफिथ्स ने कैसे उस खंड के उद्देश्य को बिल्कुल गलत समझा है। सरकार की स्थिति है .....
श्री पी. जे. ग्रिफिथ्स ः मैं व्यक्तिगत स्पष्टीकरण देना चाहूंगा कि मैंने उपखंड (छ) का उल्लेख नहीं किया है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुझे इस बात का खेद है कि मैंने माननीय सदस्य को गलत समझा। मैंने यही समझा था। मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि सरकार की स्थिति नितांत स्पष्ट है और इसे संक्षेप में बताया जा सकता है। मैं 1941 में प्राप्त श्रम और पूंजी का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न संगठनों के विचारों का अध्ययन करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि जो ठोस शर्तें रखी गई हैं, वे पर्याप्त हैं। परंतु सरकार इस बारे में कोई हठधर्मिता नहीं रखना चाहती और सरकार यह भी महसूस नहीं करती कि कुछ ऐसी शतें भी हो सकती हैं जिन्हें प्रांतीय सरकारें या श्रमिकों के नियोक्ता अथवा मजदूर संघ मान्यता प्रदान करने के प्रश्न पर विधेयक में जोड़ना आवश्यक समझें। इसी प्रकार की आकस्मिकताओं के लिए हमने इन खंडों में कई जगह यह कहा है कि अन्य शर्तें निर्धारित की जा सकती हैं। यह एक बचाव का रास्ता है, यह एक अवसर है जो हमने प्रदान किया है तथा इन खंडों को इस प्रकार बताया है कि हम उस परामर्श का लाभ उठा सकें जो हमें मिले। विधयेक के उपबंधों में इस बारे में कोई अस्पष्टता तथा अनिश्चितता नहीं है कि प्रतिनिधि स्वरूप से क्या अभिप्राय है।
श्री पी. जे. ग्रिफिथ्स ः मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या आप नये खंड 28(घ) और उपखंड (ज) के अर्थ को सदन के समक्ष स्पष्ट करेंगे जिसमें कहा गया है कि ‘‘यह प्रतिनिधि मजदूर संघ है’’?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः इसका अर्थ ऐसे संघ से है जिसे प्रतिनिधि मजदूर संघ के रूप में बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया हो।
श्री पी. जे. ग्रिफिथ्स ः क्या बोर्ड अपनी मर्जी के अनुसार मान्यता देगा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः बोर्ड जांच करेगा, और यही मेरे मित्र श्री जोशी की टिप्पणी का मुख्य बिंदु था। श्री जोशी ने कहा था कि बोर्ड को सभी प्रकार की जानकारी मांगने का अधिकार है जिसमें गैर-सरकारी सदस्यों के विचार भी शामिल हैं।
श्री पी. के. ग्रिफिथ्स ः क्या ऐसा कोई इरादा है कि बोर्ड को इस बारे में कुछ मार्गदर्शन दिया जाएगा कि ‘‘प्रतिनिधि’’ का क्या अर्थ होता है?